– 12 घण्टे कर रहे काम, उस हिसाब से नहीं दे रहे सैलरी
भिण्ड, 17 दिसम्बर। औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर में संचालित कई कंपनियों में बिना ईएसआई, पीएफ जमा किए मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। मालनपुर उद्योग क्षेत्र में संचालित कई कंपनियों में कार्य कर रहे मजदूरों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि हम मजदूरो को कंपनी में ईएसआई एवं पीएफ का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है और ना ही 12 घण्टे के हिसाब से पूर्ण पेमेंट दिया जा रहा है। कई कंपनियों में कंपनी मैनेजमेंट एवं लेबर कांट्रेक्टर की मिली भगत से हमारा हक छीनकर अपनी अपनी जेबे में भारी जा रही हैं।
जबकि कई कंपनियों में तो 12 घण्टे की 26 ड्यूटी के हिसाब से 16 से 18 हजार रुपए सैलरी प्लस ईएसआई पीएफ मिल रहा है। तो वहीं कई कंपनियों में 12 घण्टे के मात्र 12 से 15 हजार रुपए ही बिना ईएसआई पीएफ के दिए जा रहे हैं। उद्योग क्षेत्र मालनपुर लगभग 40 हजार से अधिक मजदूरों वाला नगर है। जिसमें कई कंपनियों के मालिक एवं ठेकेदार मजदूरों के मासिक वेतन से ईएसआई व पीएफ की राशि काटने के बाद भी उनके खाते में जमा नहीं कर रहे हैं और कई कंपनियों में कंपनी मालिक एवं लेबर कांट्रेक्टर अपनी जेब भरने के चक्कर में मजदूरो की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे है और वहीं कुछ कंपनियों में ना ही ई एस आई और ना ही पीएफ का पैसा काट रहे हैं और ना ही जमा कर रहे हैं और तो ओर जो हमारी पूर्ण सैलरी बनती है, वह भी मजदूरों को नहीं मिल पा रही है। हैरानी की बात तो यह है कि ऐसा काम छोटी कंपनियों के मालिक ही नहीं बड़ी-बड़ी नामी ग्रामी कंपनियों के जिम्मेदार भी कर रहे हैं।
शिकायत करने पर मजदूरों को नौकरी जाने का रहता है खतरा
मजदूरों का कहना है कि हम शिकायत करने जाएं तो कहां जाएं, क्योंकि अगर हम श्रम विभाग या किसी पत्रकार को अपनी परेशानी या शिकायत करते हैं तो मजदूर कांट्रेक्टर एवं कंपनी मैनेजमेंट द्वारा हमें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ता जाता है और जो भी पैसा जैसे तैसे मिल रहा है वह भी नहीं मिलेगा। जिस कारण हम मजदूर इसी दवाव में जो मिल रहा है उसी में काम करते रहते हैं। इस सब की पहले भी कई बार श्रम विभाग में शिकायत हो चुकी है, लेकिन श्रम अधिकारियों द्वारा भी कोई निराकरण नहीं किया जाता है, हमें तो श्रम अधिकारी, कंपनी मैनेजमेंट एवं लेबर कांटेक्टरों कि मिली भगत लगती है। क्योंकि यह सब संबंधित अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहा है।
जानिए क्या है ईएसआई और पीएफ
सोशल सिक्योरिटी के लिए भारत सरकार ने ईएसआईसी और पीएफ के दो विभाग बने हैं, देश में जहां-जहां इंडस्ट्री है वहां दोनों विभागों के अधिकारी बैठते हैं। ईएसआईसी का काम पंजीकृत मजदूर को जहां इलाज की सुविधा देने के साथ-साथ ही बीमार होने के दौरान वेतन तथा अन्य हित लाभ देना होता है तो वहीं पीएफ कर्मचारियों के भविष्य निधि के लिए काम करता है वही दोनों संस्थाएं श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीनस्थ है।
यह काम करने वाले होते है ईएसआई के हकदार
जिन कंपनियों में 10 या उससे अधिक मजदूर काम कर रहे हैं। उन्हें यहां 21 हजार रुपए मासिक से कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को ईएसआई सुविधा देना अनिवार्य रहा।
इनका कहना है:
”जिन श्रमिकों, कर्मचारियों को 21 हजार रुपए से कम वेतन मिलता है उन्हें ईएसआई का लाभ मिलना अति आवश्यक होता है। क्योंकि कंपनियों में कार्य करते समय श्रमिकों के साथ घटनाएं घटित होती हैं जिसमें ईएसआई द्वारा इलाज आदि सेवाओं का लाभ दिया जाता है। इसलिए हर कर्मचारी का ईएसआई कटना आवश्यक होता है।”
डॉ. कमल किशोर यादव, ईएसआई मालनपुर”पार्ले में तो न्यूनतम वेतन के संबंध कैसे चल रहा है। लेकिन अपनी हरकतों से बाज नहीं आते, जिस कारखानों में मजदूर श्रमिक 10 या उससे अधिक कार्य करते हैं, तो ईएसआई की सुविधा अति आवश्यक होती है और 20 श्रमिक या उससे अधिक कंपनीओ में मजदूर कार्य करते हैं तो वहां पीएफ का भी मिलना अनिवार्य होता है। लेकिन यहां कई कंपनियां उन नियमों का पालन नहीं कर रही है। मजदूरों के साथ खुला खुला दुर्व्यवहार किया जा रहा है।”
देवेन्द्र शर्मा, जिला कार्यकारी अध्यक्ष कम्युनिटी पार्टी (सीटू)

