– अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन ने मनाया 120वां स्थापना दिवस
भिण्ड, 24 मई। आयुर्वेद हमारी जीवन पद्धति है, यह धरोहर हमारे पूर्वज हमे सौंप कर गए हैं, इसे हमें जीवन में उतारना है। यह बात डॉ. रमेश दुबे अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के 120वे स्थापना दिवस पर कही।
डॉ. दुबे ने कहा कि आज के भौतिक युग में हमारी जीवनशैली अस्त व्यस्त हो गई है, हमें स्वस्थ जीवन जीने के लिए आयुर्वेद पद्धति ही रास्ता दिखा सकती है, हमें नियमित दिनचर्या में यम, नियम, आसान, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि का अभ्यास करना चाहिए इसी को योग कहते हैं। संगठन के जिलाध्यक्ष डॉ. शिवकुमार राजौरिया ने कहा कि आयुर्वेद औषधि हमें लम्बा ओर स्वस्थ जीवन देती है, हमें दालचीनी, मेंथी, अदरक, सौंफ, जीरा, हल्दी, तुलसी, पुदीना, धनिया, लहसुन, अर्जुन की छाल लेना चाहिए जो कि हर घर में हर समय उपलब्ध होती है। उन्होंने कहा कि अगर इन्हें नियमित रूप से सेवन करते हैं तो डायबिटीज, ब्लड प्रेशर होने के चांस बहुत कम हो सकते हैं।
मुख्य वक्ता डॉ. उमाशंकर मिश्रा ने कहा कि आम जनमानस को मार्ग दिखाना हमारा नैतिक कर्तव्य है, हमारी धरोहर आयुर्वेद को हमे अभियान के रूप में प्रचारित करने है। कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुरेश वंसल, डॉ. बीएन भारद्वाज, डॉ. वासुदेव नरवरिया, डॉ. विश्वनाथ शर्मा, डॉ. मधुरेश त्रिपाठी का शॉल श्रीफल देकर सम्मान किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. रमेश दुबे को शॉल श्रीफल से डॉ. आरडी परिहार ने सम्मान किया। कार्यक्रम की शुरुआत में भगवान धनवंतरी जी की पूजन कर के दीप प्रज्ज्वलित किया गया। इस अवसर पर डॉ. प्रभुदयाल शाक्य, डॉ. बालकराम श्रीवास, डॉ. सुरेश वर्मा, डॉ. सुरेश शाक्य, डॉ. नामदेव, समाजसेवी शिवप्रताप सिंह, शैलव सिंह सहित कई चिकित्सक उपस्थित रहे। कार्यक्रम डॉ. मधुरेश त्रिपाठी के निवास पर संपन्न हुआ, संचालन और आभार डॉ. आरडी परिहार ने व्यक्त किया।


