– ना रोशनी, ना सफाई, ऊपर से ताले में कैद और बारिश के पानी से लबालब भरकर बन जाता है तालाब
भिण्ड, 24 मई। जिले के मिहोना नगर में लाखों रुपए की लागत से बनाया गया पार्क अपनी ही बदहाली पर आंसू बहा रहा है। मिहोना नगर परिषद के समीप बना पार्क बदहाली और लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। सुबह की सैर करने वाले हों या दौड़ लगाते युवा, हर कोई आज इस पार्क की दुर्दशा से परेशान और हताश हैं। हालांकि बनने के बाद से उक्त पार्क को नगर परिषद ने दो ताले में केद कर रखा है। लेकिन पार्क परिसर में ना पर्याप्त रोशनी है और ना ही साफ सफाई हुई। नप की नाक के नीचे बने पार्क की बदहाल हालात पर प्रशासन आंखें बंद कर बैठा।
सफाई के नाम पर जीरो व्यवस्था
पार्क की साफ-सफाई की स्थिति बेहद चिंताजनक है, जगह-जगह घास और झाड़ियां उग आई हैं। कुर्सियां टूटी हुई हैं, बैठने की कोई सुविधा नहीं है, गंदगी से भरे पड़े हैं। कचरे का नियमित निस्तारण नहीं होने से परिसर बदबू मार कर स्वच्छता अभियान को मुंह चिढ़ा रहा।
पास से निकलने वाल नाला बना रहा है जलभराव का कारण
पार्क के मुख्य द्वार के पास एवं पीछे साइड़ से बने नाले से लगातार बारिश का पानी अंदर तक घुस कर के जमीन दलदल में तब्दील हो जाती है। नालियों की साफ-सफाई न होने से पानी का बहाव रुका हुआ है और जलभराव स्थाई समस्या बन चुका है। जब नगर परिषद अपने पास की व्यवस्था बनाने में नाकाम साबित हो रही तो समूचे वार्डों की स्थिति का आंकलन इससे किया जा सकता है।
शिकायतों के बावजूद नहीं होती सुनवाई
जन प्रतिनिधि व स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर परिषद में शिकायत का स्थिति की जानकारी दी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। पार्षद देशराज श्रीवास कहते है कि कई लिखित शिकायत कर चुके हैं, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है।
जिम्मेदार कौन?
पार्क की देख-रेख का जिम्मा नगर परिषद पर है, लेकिन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों और सफाई कर्मियों पर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। अधिकारियों से संपर्क करने पर केवल आश्वासन ही मिलता है, जबकि हालात दिन पर दिन और बदतर होते जा रहे हैं।
क्या बोले अधिकारी
”मेरे संज्ञान में नहीं है, आपने बताया है, विभाग के अधिकारी को अवगत कराऊंगा, अगर समुचित व्यवस्था नहीं हुई तो संबधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
केएल मीणा, कलेक्टर भिण्ड


