– भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में चौ. रूपनारायण दुबे समाज कल्याण समिति पुरस्कृत
भिण्ड, 24 मई। अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 2026 के अवसर पर मप्र राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा भोपाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट, नेहरू नगर भदभदा रोड में राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया गया। समारोह में भिण्ड जिले की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था चौधरी रूपनारायण दुबे समाज कल्याण समिति भिण्ड को राज्य स्तरीय वार्षिक जैव विविधता पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया। संस्था को अशासकीय संस्थागत श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
संस्था द्वारा भिण्ड जिले के लगभग 20 गांवों में पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य किया गया। इस पहल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की जैव विविधता, स्थानीय वनस्पतियों, औषधीय पौधों, पारंपरिक कृषि पद्धतियों एवं प्राकृतिक संसाधनों का दस्तावेजीकरण किया गया। संस्था द्वारा जैव विविधता संरक्षण, जल संवर्धन, पर्यावरण जागरूकता एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। समारोह में राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों एवं अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण चेन्नई के अध्यक्ष वीरेन्द्र आर. तिवारी, भारतीय वन प्रबंधन संस्थान भोपाल के निदेशक डॉ. के. रविचंद्रन, राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण चेन्नई के सदस्य सचिव डॉ. बी. बालाजी, मप्र राज्य जैवविविधता बोर्ड भोपाल के सदस्य सचिव सुदीप सिंह तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार के वैज्ञानिक रघु कुमार कोडली कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
मप्र राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा संस्था को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह (ट्रॉफी) एवं 2 लाख रुपए की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। संस्था के प्रतिनिधियों ने पुरस्कार ग्रहण करते हुए इसे पूरे भिण्ड जिले एवं ग्रामीण समुदायों के लिए गौरव का क्षण बताया। संस्था द्वारा पिछले कई वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में पौधारोपण, पर्यावरण शिक्षा, जल संरक्षण, जैविक खेती एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु निरंतर कार्य किया जा रहा है। संस्था के इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ी है तथा स्थानीय समुदायों की सहभागिता भी मजबूत हुई है। संस्था के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी प्रकृति एवं जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में और अधिक व्यापक स्तर पर कार्य किए जाएंगे।


