भिण्ड, 10 मई। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस भिण्ड में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के साप्ताहिक पखवाड़े के अंतर्गत ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता डॉ. शरद त्रिपाठी ने प्रौद्योगिकी के बारे में विद्यार्थियों को विस्तार पूर्वक बताया।
उन्होंने बताया कि मनुष्य लंबे समय से प्रौद्योगिकी का विकास कर रहे हैं, औजारों और हथियारों को डिजाइन करने में और बनाने की क्षमता को मानव जाति का विशेष पहलू माना जाता है, प्रौद्योगिकी का एक विशेष उदाहरण अग्नि भी है, लगभग 15 लाख वर्ष पूर्व मनुष्य ने पत्थरों के चूल्हों में अग्नि का उपयोग करना शुरू किया था। अग्नि का उपयोग मनुष्य जानवरों को भगाने में और भोजन पकाने में करते थे।
डॉ. शरद त्रिपाठी ने बताया कि प्रौद्योगिकी व्यावहारिक उद्देश्यों या अनुप्रयोगों के लिए वैज्ञानिक ज्ञान का उपयोग है, चाहे उद्योग में हो या हमारे दैनिक जीवन में। इसलिए, मूल रूप से, जब भी हम किसी विशिष्ट उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए अपने वैज्ञानिक ज्ञान का उपयोग करते हैं, तो हम प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहे होते हैं। खैर, इससे कुछ ज्यादा ही है। प्रौद्योगिकी में आमतौर पर उपकरण का एक विशिष्ट टुकड़ा शामिल होता है, लेकिन वह उपकरण अविश्वसनीय रूप से सरल या चमकदार जटिल हो सकता है। यह पहिए की खोज से लेकर कंप्यूटर और एमपी3 प्लेयर तक कुछ भी हो सकता है। भारत की आजादी के समय हमारा वैज्ञानिक व प्रौद्योगिकी ढांचा न तो विकसित देशों जैसा मजबूत था और न ही संगठित। इसके बावजूद प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हमने काफी कम समय में बड़ी उपलब्धियां हांसिल कीं। स्वतंत्रता के बाद भारत का प्रयास यही रहा है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन भी लाया जाए, जिससे देश के जीवन स्तर में संरचनात्मक सुधार हो सके। इस उद्देश्य में हम कुछ हद तक सफल भी रहे हैं।
Sunday, May 31
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