– मछण्ड ट्रांसफार्मर काण्ड से बिजली विभाग कटघरे में, सेटिंग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
भिण्ड, 08 मई। लहार क्षेत्र के ग्राम मछण्ड में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। गांव के बाल्मीकि मोहल्ला में लगा 25 केव्ही ट्रांसफार्मर हटाकर दूसरे गांव भेजे जाने के आरोपों ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि गरीबों के घरों का उजाला छीनकर दूसरे गांव में रोशनी पहुंचाई गई, जबकि मछंड का मोहल्ला पिछले 6 महीनों से अंधेरे में जिंदगी काटने को मजबूर है।
ग्रामीणों के अनुसार ट्रांसफार्मर पहले पावर हाउस के बाहर रखा था और मछण्ड-विश्वारी रोड पर बने मकानों की बिजली उसी से चल रही थी। आरोप है कि बाद में बड़ी मोरखी गांव के लोग ट्रांसफार्मर उठाकर ले गए। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि ट्रांसफार्मर विभागीय कर्मचारियों की बजाय प्राइवेट लोगों से उतरवाया गया। जब गांव के लोगों ने ट्रांसफार्मर उतार रहे लोगों से पूछा कि इसे कहां ले जाया जा रहा है, तो कथित रूप से जवाब मिला कि रोहित सिंह सुपर वाइजर की लेन-देन की सेटिंग से ट्रांसफार्मर दूसरे गांव भेजा जा रहा है। इसके बाद ग्रामीणों ने मिहोना बिजली विभाग के सुपर वाइजर रोहित सिंह पर पैसों के लेन-देन और मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 40 से 50 गरीब परिवार बिजली के बिना जीवन यापन कर रहे हैं। भीषण गर्मी में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बेहाल हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी पूरी तरह बेपरवाह बने हुए हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद जेई और अन्य अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। गांव में नया ट्रांसफार्मर तो रखा गया, लेकिन वह सिर्फ शो-पीस बनकर खड़ा है। केबलें लटक रही हैं और बिजली सप्लाई आज तक शुरू नहीं हुई। इससे लोगों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग में नियम-कायदों को ताक पर रखकर मनमानी की जा रही है। अब गांव में बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर गरीबों की बस्ती को अंधेरे में धकेल कर दूसरे गांव को फायदा किसके इशारे पर पहुंचाया गया? क्या बिजली विभाग में पैसा दो और डीपी लो का खेल चल रहा है? ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने, दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करने तथा तत्काल बिजली सप्लाई बहाल करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
तीखे सवाल
आखिर गरीबों के हिस्से की रोशनी किसके दबाव में छीनी गई? प्राइवेट लोगों से ट्रांसफार्मर उतरवाना क्या विभागीय नियमों का खुला उल्लंघन नहीं? क्या बिजली विभाग में अब सेटिंग और लेन-देन से तय होगा कि किस गांव में उजाला रहेगा और कौन अंधेरे में डूबेगा।


