– अद्वैत सिद्धांत से समाज को मिली एकता की दिशा : सिसोदिया
– शंकराचार्य जयंती पर जन अभियान परिषद ने आयोजित की व्याख्यान माला
भिण्ड, 03 मई। समाज में समरसता समानता और एकात्मता के लिए आदि गुरु शंकराचार्य के संदेश को घर-घर पहुंचाना आवश्यक है, तभी हमारे देश में समदृष्टि और समभाव का वातावरण निर्मित होगा। यह बात बतौर मुख्य अतिथि प्रभारी चंबल संभाग अमिताभ श्रीवास्तव ने जिला पंचायत सभागार में मप्र जन अभियान परिषद भिण्ड की जिला पंचायत भिण्ड के सभागार में जिला स्तरीय आचार्य शंकर के जीवन वृत्त पर आधारित एक दिवसीय व्याख्यान माला ‘एकात्म पर्वÓ में कही। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि समाजसेवी डॉ. शैलेन्द्र परिहार, श्रवण पाठक, विकासखण्ड समन्वयक बृजेन्द्र शर्मा (गोहद), जयप्रकाश शर्मा (मेहगांव), सोहन सिंह भदौरिया (अटेर) सहित नवांकुर संस्थाओं के प्रतिनिधि सीएमसी एलडीपी के छात्र, मेंटर्स, प्रस्फुटन समितियों के प्रतिनिधि सहित अन्य समाजसेवी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन जिला समन्वयक डॉ. शिव प्रताप सिंह भदौरिया एवं आभार प्रदर्शन लहार एवं रौन समन्वयक सुनील कुमार चतुर्वेदी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर समाज में उत्कृष्ट कार्य कर रहे समाज सेवियों को सम्मानित किया गया।
अमिताभ श्रीवास्तव ने कहा कि सामाजिक विषमताओं का दौर सदैव से चलता रहा है, समाज में विभिन्न मतों के माध्यम से अपने अपने संदेश दिए गए हैं, उनमें कुछ संदेश समाज को विकास की ओर प्रगति की ओर लेकर जाने वाले भी रहे हैं, तो कुछ संदेश ऐसे भी रहे हैं जिनसे समाज में विघटन की स्थिति बनी। जातीय भेदभाव पनपा और सामाजिक विद्वेष बढ़ा, ऐसी स्थिति में आचार्य शंकर ने समाज में समरसता, समानता और एकात्मता के लिए अद्वैत मत को साकार किया। जिससे कि समाज में एकरूपता आ सके उनका यह कार्य संसार को एक सूत्र में पिरोने का था सही मायने में हमें उनके संदेश को आज घर-घर पहुंचाने की आवश्यकता है।
विशिष्ट अतिथि संभागीय समन्वयक धर्मेन्द्र सिंह सिसोदिया ने कहा कि सही मायने में सामाजिक समरसता के पुरोधा थे आचार्य शंकर, वह ऐसे समय पर इस धरती पर प्रकट हुए जब देश में स्थितियां धर्म के प्रतिकूल थीं, विभिन्न मतों, संप्रदायों, संगठनों, जातियों में देश बटा हुआ था और लोगों में धर्म के प्रति अरुचि तथा व्यभिचार बढ़ रहा था, ऐसे में उन्होंने चारों मठों की स्थापना करके देश को एक नया मत दिया और समाज को सही दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
वरिष्ठ चिकित्सक एवं समाजसेवी डॉ. शैलेन्द्र परिहार ने कहा कि आचार्य शंकर का विषय कितना दूर है कि आम जनमानस में आज भी इसकी समझ बहुत कम है। मप्र जन अभियान परिषद बधाई का पात्र है जो इस पवित्र कार्य को निरंतर कर रहा है। उन्होंने निवृत्ति बाद और प्रवृत्ति बात पर बात रखते हुए कहा कि समय-समय पर दोनों स्थितियों में हमें समझकर निर्णय लेना चाहिए कि जीवन का मूल उद्देश्य क्या है, तभी हम आचार्य शंकर को समझ पाएंगे देश को एक सूत्र में पिरोने का काम आचार्य शंकर ने किया विश्व सदैव उनका ऋणी रहेगा।
वरिष्ठ समाजसेवी श्रवण पाठक ने कहा कि आज के इस आयोजन में आकर मन को शांति मिली है और यह विश्वास हुआ है कि हम सही दिशा में जा रहे हैं ऐसे संतों के बारे में इन युवाओं को बताने कि आज के समय बेहद आवश्यकता है और यह काम जन अभियान परिषद बखूबी कर रहा है। आचार्य शंकर ने देश को एक नई दिशा प्रदान की, यह हम सब जानते हैं, लेकिन उनके संदेशों को आज जन अभियान परिषद के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है, यह शासन का उत्कृष्ट कार्य है, यह निरंतर रहना चाहिए, आचार्य शंकर वह सूर्य थे जिन्होंने इस जगत को ज्ञान का एक नया प्रकाश दिया है। अंत में अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।


