– रुक्मणि विवाह की कथा में भक्तों का उमड़ा सैलाब
भिण्ड, 28 अप्रैल। जिले के नगर मिहोना के ग्राम ररी में गौड़ बाबा प्रांगण में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छटवे दिन कथा वक्ता हेमंत कृष्ण शास्त्री ने कहा कि संसार में परोपकार से बढ़कर कोई धर्म नहीं है और दूसरों को कष्ट पहुंचाने के बराबर कोई पाप नहीं है। इस कारण से हमें जीवन में ज्यादा से ज्यादा नि:स्वार्थ हो करके दूसरों की भलाई एवं सेवा करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम सभी को अपने जीवन में ऐसे कार्य करना चाहिए, जिससे दूसरे व्यक्ति का हित हो रामचरितमानस में बाबा गोस्वामी दास महाराज ने कहा है कि परहित सरिस धर्म नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधिमाई।। अर्थात हमारे द्वारा कोई ऐसा काम नहीं किया जाए जिससे दूसरे व्यक्ति को पीड़ा पहुंचे हम अपने जीवन में परहित करें और सत्य बोलें सत्य बोलना भी दूसरा बहुत बड़ा धर्म है और असत्य बोलना बहुत बड़ा पाप है। तुलसीदास जी ने कहा है कि धर्म न दूसर सत्य समाना। आगम निगम पुराण बखाना।। कहावत में भी कहा गया है कि पुण्य की जड़ पाताल और पाप की जड़ अस्पताल में होती है। कथा के दौरान अक्रूर प्रसंग की कथा कहते हुए कंस वध की कथा सुनाई और कंस की पत्नी अस्ति प्राप्ति अपने पिता जरासंध के यहां गई तो जरासंध ने 17 बार मथुरा मण्डल पर चढ़ाई की 18वी बार दो बिपत्ती काल यवन और जरासंध के रुप में आई। काल यवन को मुचकुंद के द्वार भस्म कराके द्वारिका नगरी का निर्माण कराया एवं सुदामा जी की कथा सुनाई और भगवान श्रीकृष्ण ने फूल होली मनाई।
कथा में यजमान सूरज प्रसाद शर्मा एवं भारी संख्या में श्रोतागण मौजूद रहे। अंत में श्रीमद् भागवत की आरती के बाद प्रसादी वितरण की गई। इस दौरान कथा व्यास पीठ से पूर्व नप अध्यक्ष कैलाश नरायण मिश्रा, संतोष भारद्वाज, रामअवतार चौधरी, प्रभाकर शर्मा, शशि भारद्वाज, चित्रकांत दोहलिया, मनोज तिवारी, सत्यनारायण हिन्नारिया, कुलदीप शर्मा, अनिल शर्मा, मण्डल अध्यक्ष लहार सुभाष अग्निहोत्री, संजीव चौधरी, मोनू उपाध्याय, प्रदीप जोशी, राकेश शर्मा ने आशीर्वाद लिया।


