– हैण्डपंप हटाकर लगाया मोटर आधारित सिस्टम भी ठप, बिजली कनेक्शन कटा
– स्थानीय समिति को जिम्मेदारी सौंपकर पल्ला झाड़ने के आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश
भिण्ड, 26 अप्रैल। मालनपुर क्षेत्र के वार्ड क्र.3 खुमान का पुरा में पेयजल संकट दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। यहां गोदरेज कंज्यूमर से जुड़े एक एनजीओ द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत स्थापित किया गया आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) प्लांट पिछले लगभग दो महीनों से बंद पड़ा हुआ है, जिससे क्षेत्र के सैकड़ों लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार पहले इस स्थान पर एक हैण्डपंप लगा हुआ था, जो पानी का प्रमुख स्त्रोत था। लेकिन एनजीओ द्वारा आधुनिक सुविधा के नाम पर हैण्डपंप हटाकर मोटर आधारित आरओ सिस्टम लगाया गया। शुरुआत में यह व्यवस्था कुछ समय तक चली, लेकिन रखरखाव के अभाव में अब पूरी तरह ठप हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट में लगी मोटर भी खराब हो चुकी है और उसका बिजली कनेक्शन भी काट दिया गया है। वर्तमान में पूरा सिस्टम निष्क्रिय पड़ा है। जिन दिनों नगर पालिका द्वारा जल आपूर्ति नहीं होती, उन दिनों हालात और भी खराब हो जाते हैं। लोगों को दूर-दराज से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
खुमान का पुरा निवासी सुरेन्द्र गौड़ ने बताया कि हमारे वार्ड में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। कई बार ऐसा होता है कि नगर पालिका की तरफ से पानी नहीं आता, तब हमें दूर से पानी लाना पड़ता है। इस प्लांट की मोटर भी खराब है। जब यह वाटर प्लांट एनजीओ द्वारा लगाया गया है, तो उसका पूरा रखरखाव भी उसी की जिम्मेदारी है। साथ ही समय-समय पर उनके अधिकारियों को इसका निरीक्षण भी करना चाहिए, ताकि ऐसी स्थिति पैदा न हो।
समिति बनाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि एनजीओ द्वारा प्लांट स्थापना के बाद स्थानीय लोगों की एक समिति बनाकर रख-रखाब की जिम्मेदारी उसी समिति को सौंप दी गई थी। हालांकि समिति को न तो पर्याप्त संसाधन दिए गए और न ही तकनीकी सहयोग मिला। इसके चलते प्लांट में खराबी आने के बाद उसे सुधारने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो सकी। लोगों का कहना है कि इस प्रकार की व्यवस्था बनाकर एनजीओ ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया, जबकि सीएसआर के तहत किए गए कार्यों में निरंतर निगरानी और संचालन सुनिश्चित करना भी संस्था की जिम्मेदारी होती है।
एनजीओ की भूमिका पर उठते सवाल
सामाजिक कार्यों के लिए गठित एनजीओ का उद्देश्य जनहित में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनका सुचारू संचालन सुनिश्चित करना होता है। लेकिन खुमान का पुरा की स्थिति यह दर्शाती है कि योजना तो बनाई गई, पर उसके दीर्घकालिक संचालन पर ध्यान नहीं दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार सीएसआर के तहत किए गए कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और स्थायित्व अनिवार्य होते हैं। यदि कोई परियोजना कुछ समय बाद ही बंद हो जाती है और आमजन को उसका लाभ नहीं मिल पाता, तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाती है और इसकी जांच आवश्यक होती है।
ग्रामीणों की मांग क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि बंद पड़े आरओ प्लांट को तत्काल चालू कराया जाए। हटाए गए हैण्डपंप जैसी वैकल्पिक जल व्यवस्था बहाल की जाए। गोदरेज कंज्यूमर से जुड़े एनजीओ की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो। स्थानीय समिति को आवश्यक संसाधन और तकनीकी सहयोग दिया जाए। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
आक्रोश बढ़ने के संकेत
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि विकास के नाम पर इस प्रकार की लापरवाही अब सहन नहीं की जाएगी। खुमान का पुरा की यह स्थिति विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है, जहां योजनाएं शुरू तो की जाती हैं, लेकिन उनके रख-रखाब और निगरानी में गंभीर लापरवाही बरती जाती है। आवश्यकता है कि संबंधित संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी को समझें और जनता को मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करें।
इनका कहना है:
”हमारी कंपनी के द्वारा कोई भी आरओ प्लांट नहीं लगाया गया है।”
आनंद शर्मा, मैनेजर गोदरेज कंज्यूमर


