– राकेश अचल
केन्द्रीय चुनाव आयोग यानि केंचुआ कुलबुलाना नहीं भूला। सरकारी पार्टी के इशारे पर शीत निंद्रा में जाने वाला केंचुआ हुक्म मिलते ही फन न होते हुए भी फुफकारने लगता है। चुनावी सरगर्मियों के बीच जारी सियासी जुबानी जंग को लेकर केंचुआ यानि चुनाव आयोग सख्त हुआ है। चुनाव आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर दिए गए विवादित आतंकवादी बयान को लेकर नोटिस जारी किया है। आयोग ने इसे चुनावी आचार संहिता का संभावित उल्लंघन मानते हुए 24 घण्टे के भीतर जवाब तलब किया है।
आपको याद दिला दूं कि ये वो ही केंचुआ है जिसे 700 नामचीन लोगों की शिकायत सुनाई नहीं देती। ये शिकायत प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर थी, लेकिन केंचुआ की क्या मजाल कि वो अपने आका को नोटिस जारी करे। केंचुआ को केन्द्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, किरण रिजिजू और अर्जुनराम मेघवाल समेत भाजपा नेताओं की आवाज फौरन सुनाई दे जाती है। इन नेताओं के प्रतिनिधि मण्डल ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर खरगे के बयान को लेकर कड़ी शिकायत की और सख्त कदम उठाने की मांग की।
दरअसल खरगे ने तमिलनाडु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री मोदी को आतंकवादी कह दिया था। खरगे के इस बयान ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी और इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। हालांकि विवाद बढ़ने पर खरगे ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इशारा टैक्स टेररिज्म की ओर था, जहां एजेंसियों के जरिए विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से आतंकवादी कहना नहीं था, बल्कि राजनीतिक माहौल पर टिप्पणी करना था।
खरगे के बयान पर भाजपा बिलबिला गई। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने वाले प्रधानमंत्री को इस तरह संबोधित करना दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए चुनाव आयोग से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। केंचुआ द्वारा मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कथित तौर पर आतंकवादी कहे जाने वाले विवादित बयान पर नोटिस जारी किए जाने के बाद सियासत और गरमा गई है। शिवसेना उद्धव गुट के सांसद संजय राउत ने कहा कि जो कोई डराता है वह दहशत पैदा करता है। महाराष्ट्र में डराया। पश्चिम बंगाल में डरा रहे हैं न। उन्होंने कहा कि ईडी, सीबीआई और चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट उनके डराने के हथियार और मिसाइल हैं। इनके माध्यम से पीएम मोदी देश को डराते हैं।
संजय राउत ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री दहशत फैलाते हैं। फिर चुनाव लड़ते हैं और जीत जाते हैं। मल्लिकार्जुन खरगे को भी यह कहना है। इस पर पीएम मोदी को कहना चाहिए कि यह झूठ है या सच। उन्होंने कहा कि अभी भी पीएम मोदी डरा रहे हैं। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक मंजूर न होने के बाद भी महिलाओं के नाम पर डरा रहे हैं। संजय राउत ने कहा कि आप कौन होते हो, हम देख लेंगे, हमको क्यों धमकियां दे रहे हो। उन्होंने कहा कि पीएम कहते हैं तुमको इसका परिणाम भुगतना होगा। तो यह डराने की जो भाषा है उसे दूसरे शब्द में आतंकवाद कहा जाता है। यह पॉलिटिकल टेररिज्म कहलाता है।
पॉलिटिकल टेरेरिज्म अब बंगाल और तमिलनाडु में भी इस्तेमाल हो रहा है। सोशल मीडिया पर पालटीकल टेरेरिज्म का अलग रंग है। अब तो चेहरों के भी रंग बदला है। लेकिन केंचुआ मौन रहा। अब नेता अलग-अलग सूबे से पॉलिटिकल टेरेरिज्म खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा। मतदाताओं को डराने के लिए अर्ध सैनिक बलों को बख्तरबंद गाड़ियां उतारी गई है। देखते हैं कौन, कितना डराता है?


