– राकेश अचल
ईरान के खिलाफ अमेरिका और इसराइल के सैन्य अभियान को आज पूरा एक महीना हो गया, लेकिन युद्ध विराम की कोई सूरत नजर नहीं आ रही, उल्टे खाड़ी में नए मोर्चे खुलने लगे हैं। इससे युद्ध और खतरनाक होने की आशंका बढ़ गई है। गत दिवस यमन से इसराइली इलाके की ओर मिसाइलें दागी गईं। 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ हमले शुरू होने के बाद से ईरान ने न केवल इसराइल के, बल्कि अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देशों के खिलाफ भी जवाबी हमले किए हैं। दूसरी तरफ इसराइल ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए हैं।
यमन से हुए हमले के बारे में जानकारी इसराइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने अपने टेलीग्राम चैनल पर जारी की। आईडीएफ ने कहा कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम खतरे को रोकने के लिए पूरी तरह से काम कर रहे हैं। कुछ ही अंतराल बाद उसी चैनल के जरिए, सेना के अधिकारियों ने बताया कि उन मिसाइलों को रोक लिया गया था और इससे कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।
युद्ध का नया मोर्चा इजराइल से ज्यादा अमेरिका के लिए तकलीफ देने वाला है। यमन के इस्लामी गुट हूती विद्रोहियों ने पुष्टि की कि उन्होंने ईरान, लेबनान, इराक और फलस्तीनी इलाकों पर उस देश के हमलों के जवाब में इसराइल के रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि उनके हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक सभी प्रतिरोध मोर्चों के खिलाफ आक्रामकता बंद नहीं हो जाती।
जानकारों का मानना है कि इस संघर्ष में हूती विद्रोहियों के शामिल होने से बड़े पैमाने पर युद्ध की संभावना बढ़ जाती है, जिसमें अरेबियन पैनिनसुला पर एक नया मोर्चा खुल सकता है। इस आशंका से बाजारों में पिछले लगभग एक महीने से चल रही उथल-पुथल और भी ज्यादा बढ़ सकती है। आपको बता दें कि इस इस्लामी गुट का 2014 से ही उत्तर-पश्चिमी यमन पर कब्जा है। इसी वजह से दुनिया के एक और मुख्य व्यापारिक मार्ग रेड सी (लाल सागर) पर भी इसका नियंत्रण है। 2023 के आखिर में सात अक्टूबर के हमलों के बाद इसराइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध के दौरान हूती विद्रोही हमास के साथ खड़े रहे हैं। हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन भी हासिल है।
फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए इन्होंने लाल सागर से होते हुए स्वेज नहर की ओर जाने वाले मालवाहक जहाजों पर हमलों की एक पूरी श्रृंखला शुरू कर दी थी। हूती गुट के ड्रोन और मिसाइल हमलों ने कई जहाजों को निशाना बनाया, जिनमें से कुछ तो डूब भी गए। इसके चलते शिपिंग कंपनियों को ज्यादा सुरक्षित, लेकिन साथ ही ज्यादा लंबे और महंगे वैकल्पिक रास्तों को अपनाना पड़ा। इन हमलों के चलते अमेरिका, ब्रिटेन और दूसरे देशों ने इस ग्रुप के ठिकानों पर बमबारी का अभियान शुरू किया और रास्ते को फिर से खोलने के लिए जंगी जहाज भेजे। 2025 में अमेरिका ने यमन में इस ग्रुप के ठिकानों पर फिर से हमला किया, ताकि ऐसी और घटनाओं को रोका जा सके जिनसे दुनिया के व्यापार पर असर पड़ता है।
अब जब तक ईरान बातचीत की टेबिल तक नहीं आता तब तक इजराइल और अमेरिका के अलावा भारत समेत दुनिया के तमाम मुल्क चैन से नहीं रह सकते। इन तमाम मुल्कों की मुद्रा, बाजार, कारोबार सब खतरे में पड़ते जा रहे हैं। केवल तेल और गैस ही नहीं, बल्कि कच्चे तेल से बनने वाले हजारों सह उत्पादों पर इस जंग की काली छाया गहरी होती जा रही है। आप कह सकते हैं कि दुनिया का आर्थिक, सामाजिक और पारिस्थितकीय संतुलन बिगड़ सकता है। उम्मीद की जाना चाहिए कि अप्रैल का महीना शायद कोई अच्छी खबर लेकर आए, क्योंकि युद्ध से अब किसी को भी कुछ हासिल नहीं हो सकता।


