– जन अभियान परिषद की जल संरक्षण पर संगोष्ठी आयोजित
भिण्ड, 28 मार्च। मप्र जन अभियान परिषद विकास खण्ड भिण्ड द्वारा जल संरक्षण के महत्व को लेकर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन पावनपथ समाज सेवा जन कल्याण समिति के तत्वावधान में संपन्न हुआ। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य लोगों को जल की महत्ता के प्रति जागरूक करना और जल संरक्षण के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मप्र जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक डॉ. शिवप्रताप सिंह भदौरिया उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित बीएसडब्ल्यू एवं एमएसडब्ल्यू पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राएं और मेंटर्स भी शामिल हुए। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। संगोष्ठी का संचालन मेंटर नीरज शर्मा ने एवं अंत में आभार प्रदर्शन मेंटर सरिता चौहान ने किया।
अपने संबोधन में जिला समन्वयक डॉ. शिवप्रताप सिंह भदौरिया ने कहा कि पानी बचाना आज के समय में सबसे बड़ा पुण्य कार्य है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती, उसी प्रकार यदि हम आज जल संरक्षण के प्रति जागरूक नहीं हुए तो आने वाले समय में गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों और उपस्थित जनसमूह को प्रेरित करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपने स्तर पर जल बचाने के प्रयास करने चाहिए, चाहे वह घर में हो, खेत में हो या समाज में।
पावन पथ समाज सेवा संस्था के प्रतिनिधिअतुलकांत शर्मा ने कहा कि पानी के बिना जीवन संभव नहीं है। उन्होंने जल की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पृथ्वी पर उपलब्ध जल सीमित है और उसका संरक्षण करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हमें वर्षा जल संचयन, जल का पुन: उपयोग और अनावश्यक जल बर्बादी को रोकने जैसे उपायों को अपनाना चाहिए।
संगोष्ठी के दौरान बीएसडब्ल्यू और एमएसडब्ल्यू के छात्रों ने भी जल संरक्षण से संबंधित अपने विचार प्रस्तुत किए। छात्रों ने पोस्टर, भाषण और समूह चर्चा के माध्यम से जल संकट की समस्या और उसके समाधान पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार छोटे-छोटे प्रयास, जैसे नल को खुला न छोड़ना, वर्षा जल को संग्रहित करना और जल का सीमित उपयोग करना, बड़े बदलाव ला सकते हैं। कार्यक्रम में मेंटर्स ने भी छात्रों का मार्गदर्शन किया और उन्हें समाज में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग समाज में परिवर्तन लाने की सबसे बड़ी शक्ति है और यदि वे जल संरक्षण के प्रति गंभीर हो जाएं, तो निश्चित ही एक बड़ा सकारात्मक बदलाव संभव है।
संगोष्ठी के अंत में यह संकल्प लिया गया कि सभी प्रतिभागी अपने-अपने क्षेत्र में जल संरक्षण के लिए कार्य करेंगे और अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही यह भी तय किया गया कि भविष्य में इस प्रकार के और भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे समाज में जल के प्रति संवेदनशीलता बढ़े। इस प्रकार यह संगोष्ठी न केवल ज्ञानवर्धक रही, बल्कि सभी के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हुई। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया कि जल ही जीवन है और इसका संरक्षण करना हम सभी का कर्तव्य है।


