– भिण्ड नगर में संघ शताब्दी वर्ष पर प्रमुख जन गोष्ठी सम्पन्न
भिण्ड, 03 फरवरी.मनीष दुबे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन कर रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को भिण्ड नगर के गीतांजलि गार्डन बद्रीप्रसाद की बगिया मे प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक स्वप्निल कुलकर्णी ने भिण्ड नगर के प्रमुख लोगों से संवाद करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का लक्ष्य सिर्फ संगठनात्मक विस्तार नहीं, बल्कि भारतीय समाज के प्रत्येक व्यक्ति में वैचारिक और नैतिक संस्कारों को विकसित करके देश को परम वैभव की ओर ले जाना है। उन्होंने कहा के संघ की स्थापना सन् 1925 को हुई थी और इसका मूल उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना, लोगों में अनुशासन, संस्कृति, संस्कार और राष्ट्रीय भावना का विकास हो ताकि भारत समाज रूप से ऊंचा उठ सके।
उन्होंने कहा कि प्रमुख जन गोष्ठी का उद्देश्य हिन्दू समाज को एकजुट कर सामर्थ्यवान बनाना, भारत की प्राचीन संस्कृति और विरासत के प्रति गर्व महसूस करते हुए सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ाना और हिन्दुत्व को जीवन शैली के रूप में अपनाना, समाज में पिछड़े वर्गों की मदद कर भेदभाव मिटाकर सामाजिक समरसता स्थापित करना, नागरिकों में अनुशासन देश प्रेम और सेवा भाव जैसे मूल्य का विकास कर व्यक्ति निर्माण करना है। उन्होंने संघ के सेवा कार्यों को बताते हुए कहा कि श्रम, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में संघ स्वयं सेवकों के ज़रिए कार्य करता है और लोगों को एकता और समान पहचान के उद्देश्य से संगठित रखने का प्रयास करता है। संघ का मानना है कि जब व्यक्ति और समाज मजबूत होगा, तभी राष्ट्र दुनिया के मंच पर उच्च स्थान प्राप्त कर सकता है।
उन्होंने समाज की सज्जन शक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि अपने स्वयं का धन और समय देकर समाज के लिए कार्य करने वाले लोग सभी वर्गों संप्रदाय में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, आज हमें उनके अच्छे कार्यों की प्रेरणा लेते हुए उनके साथ सहयोग के लिए खड़ा होना है। संघ कुछ नहीं करता बल्कि स्वयं सेवक सब कुछ करते हैं। संघ केवल स्वयं सेवक निर्माण का कार्य करता है।
उन्होंने कहा कि आदि काल से भारत की पहचान हिन्दू धर्म से ही रही है और यह धर्म प्रकृति प्रेमी तथा हर जीव में ईश्वरीय तत्व को मानने वाला है। उन्होंने उपनिषदों और गीता का उदाहरण देते हुए कहा कि जाति के आधार पर मनुष्यों का आपस में भेदभाव करना धर्म के मूल तत्वों के खिलाफ है। जातिवाद ने समाज का बड़ा नुकसान किया है, इसलिए हमें इन संकीर्णताओं से ऊपर उठ कर देशहित में सोचना चाहिए। हिन्दू धर्म ‘एकं सत् विप्रा बहुधा वदंति’ के सिद्धांत को मानता है। इसका अर्थ यह है कि यहां विचारों की अभिव्यक्ति की आजादी के साथ-साथ एक-दूसरे की भावनाओं, मूल्यों का सम्मान करने की भी परंपरा रही है। भारत हिन्दू राष्ट्र है और इसके उत्थान व पतन के लिए हिन्दू समाज ही जिम्मेदार है। समाज में जन जागरण हेतु संघ पंच परिवर्तन को लेकर समाज में जनजागरण का कार्य का निरंतर कर रहा है। सामाजिक समरसता कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, नागरिक अनुशासन एवं कर्तव्य, और स्व-का बोध जैसे प्रमुख विषयों पर कार्य कर रहा है। कार्यक्रम में महेन्द्र शर्मा विभाग संघ चालक एवं डॉ. हिमांशु बंसल नगर संघ चालक मंचासीन रहे।


