भिण्ड, 22 जनवरी। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में आर्यावर्ती संस्कृति संगम द्वारा आयोजित युवा महोत्सव के अंतर्गत चौथे दिवस शा. पीएमश्री एमजेएस महाविद्यालय के परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत भगवान विष्णु के प्रथम मत्स्य अवतार की रंगोली का उद्घाटन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. राजकुमार आचार्य कुलगुरु जीवाजी विश्वविद्यालय ने अपने उद्बोधन में कहा कि धर्म, संस्कृति और सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने समय-समय पर अवतार लेते रहे हैं। इन्हीं अवतारों में प्रथम अवतार है मत्स्य अवतार। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ने लगा और वेदों का लोप होने का संकट उत्पन्न हुआ, तब भगवान विष्णु ने मत्स्य अर्थात मछली के रूप में अवतार लिया। कथा के अनुसार, प्रलय का समय निकट था। समस्त सृष्टि जलमग्न होने वाली थी। उस समय महर्षि मनु नदी में जल अर्पण कर रहे थे, तभी उनके हाथ में एक छोटी-सी मछली आई। मछली ने मनु से रक्षा की प्रार्थना की। मनु ने करुणावश उसे अपने कमंडल में रखा, किंतु मछली का आकार निरंतर बढ़ता गया। अंतत: भगवान विष्णु ने अपने वास्तविक स्वरूप का परिचय देते हुए कहा कि वे ही मत्स्य अवतार हैं। उन्होंने कहा कि 500 वर्ष की गुलामी के बाद राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई जिसकी आज तृतीय वर्षगांठ है।
विशिष्ट स्थिति अतिरिक्त महाधिवक्ता मप्र उच्च न्यायालय ग्वालियर दीपेन्द्र राजावत ने कहा कि छात्र जीवन का मुख्य उद्देश्य विद्या अर्जन, संस्कारों का विकास और चरित्र निर्माण होता है। इस अवस्था में अनुशासन, परिश्रम, समयपालन और आत्मसंयम जैसे गुणों का विकास किया जाता है। जो विद्यार्थी छात्र जीवन में परिश्रम करता है, वही आगे चलकर जीवन में सफलता प्राप्त करता है।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक धनराज जी ने अपने उदबोधन कहा कि भारत आज एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में विश्व पटल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति, डिजिटल क्रांति, स्टार्टअप संस्कृति और आत्मनिर्भरता की दिशा में देश निरंतर आगे बढ़ रहा है। इस परिवर्तनशील भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति है। आज के युवा शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, खेल, रक्षा, चिकित्सा और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। युवा न केवल रोजगार तलाशने वाले बन रहे हैं, बल्कि रोजगार देने वाले उद्यमी भी बन रहे हैं। साथ ही उन्होंने भारत का गौरवशाली इतिहास प्राचीन, गौरवशाली और समृद्ध रहा है। यह भूमि ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, कला और संस्कृति की विश्वगुरु रही है। तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय, वेद-उपनिषद, आयुर्वेद, गणित और खगोल विज्ञान इसकी समृद्ध परंपरा के प्रमाण हैं। किंतु समय के साथ भारत को लंबे काल तक विदेशी आक्रमणों और गुलामी का सामना करना पड़ा। अंत में उन्होंने पंच परिवर्तन में सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व (स्वदेशी एवं आत्मनिर्भरता) तथा नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। सामाजिक समरसता के माध्यम से जाति और भेदभाव से ऊपर उठकर एकता पर बल दिया गया है। कुटुंब प्रबोधन के अंतर्गत पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों को मजबूत करने का संदेश दिया गया है। पर्यावरण संरक्षण में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने, जल-वन-भूमि की रक्षा पर जोर दिया गया है। स्व के माध्यम से स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग और आत्मनिर्भर भारत की भावना को प्रोत्साहित किया गया है। वहीं नागरिक कर्तव्य के तहत संविधान, कानून, स्वच्छता और सामाजिक दायित्वों के पालन का आह्वान किया।
कार्यक्रम में रंगोली निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आर्टिस्ट भूपेन्द्र चौहान, रविकांत गोयल, वेतन कैन, रेहान खान, प्रशांत कुशवाहा, बलवीर खरे, प्रतीक्षा सैनी, निधि वर्मा, शिक्षा शिवहरे, पूनम कुमारी, साक्षी शर्मा, सुहावना गौर, साक्षी तोमर, खुशबू कोहली, हरिओम गर्ग, लक्ष्मी शर्मा, वैष्णवी गर्ग, काजल ऐशबार, अभिषेक कुशवाह को अतिथियों ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया।
Saturday, April 11
BREAKING
- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जान से मारने की धमकी, यात्रा के दौरान होगा हमला
- अंतरिक्ष से दिखाई देने वाला चांद धरती से दिखने वाले चांद से अलग
- सरकार में आए तो जवानों को मिलेगा पूरा हक : राहुल गांधी
- व्हीआईएसएम हॉस्पिटल में आयुष्मान कार्ड पर नि:शुल्क इलाज
- सिलाई सेंटर पर बैठी महिला को मारी गोली, ग्वालियर रैफर
- ओलावृष्टि से फसल बर्वाद, किसान को विशेष राहत दे बीजेपी सरकार : पिंकी
- तैयारियां समय पर पूर्ण कर दायित्वों का निर्वहन करें : कलेक्टर
- अपर संचालक ने किया डीएड कॉलेजों का निरीक्षण


