भिण्ड, 19 जनवरी। दबोह नगर के सरस्वती शिशु मन्दिर प्रांगण में रविवार को सकल हिन्दू समाज सम्मेलन का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। जात-पात की करो विदाई, हम सब हिन्दू भाई-भाई के संकल्प के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हुए। सर्वप्रथम दोपहर 2 बजे नगर में भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें मातृशक्ति ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वहीं कार्यक्रम स्थल पर संगीतमय सुंदरकाण्ड पाठ ने पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया। तदुपरांत कार्यक्रम स्थल पर कार्यक्रम में उपस्थित विद्वान संतों और प्रखर वक्ताओं ने सामाजिक समरसता और अखण्ड हिन्दुत्व का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों और संतों के आगमन के साथ हुई। मंच पर 1008 महंत प्रवीण दास महाराज (रामबाड़ा आश्रम अमरा मौठ), 1008 महंत राघवदास महाराज (महामंडलेश्वर संकट मोचन मन्दिर बिचौली), 1008 महंत मूर्तिदास महाराज (मंडल अध्यक्ष अखिल भारतीय संत समाज) और 1008 स्वतंत्र दासजी महाराज (रौन) की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथियों में विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री (मध्य भारत प्रांत) नवल भदौरिया, संजीव तिवारी, भगवान दास नायक, कालीचरण रजक, विनोद ओमथरिया और लल्लू बाल्मीक दबोह उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण,तिलक और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर गौमाता का विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके पश्चात आयोजन समिति के सदस्यों ने बारी-बारी से सभी संतों और अतिथियों का शॉल, श्रीफल भेंट कर और माल्यार्पण कर भावभीनी स्वागत किया।
हिन्दुत्व ही हमारी शक्ति : नवल भदौरिया
विश्व हिन्दू परिषद के प्रांत मंत्री नवल भदौरिया ने अपने ओजस्वी संबोधन में सकल हिन्दू समाज को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व केवल एक पहचान नहीं, बल्कि हमारी जीवन पद्धति और संस्कारों की जननी है। आज समय की मांग है कि हम जाति और पंथ की दीवारों को गिराकर सकल हिन्दू के रूप में खड़े हों। जब समाज संगठित होता है, तभी धर्म और संस्कृति सुरक्षित रहती है। हमें अपने घरों में संस्कार और समाज में समरसता लानी होगी। सकल हिन्दू समाज का यह संकल्प आने वाले समय में राष्ट्र की एकता का आधार बनेगा।
नवल भदौरिया ने समाज को जागृत करते हुए कहा कि आज यह केसरिया सागर इस बात का प्रमाण है कि हिन्दू अब जाग चुका है। इतिहास गवाह है कि जब-जब हम जातियों, उप-जातियों और छोटे-छोटे स्वार्थों में बंटे, तब-तब इस देश की माटी को अपमानित होना पड़ा। विदेशी आक्रांताओं ने हमारी एकता की कमी का फायदा उठाया।लेकिन आज हमें यह संकल्प लेना होगा कि हमारी पहली और आखिरी पहचान सिर्फ हिन्दू है। हिन्दुत्व कोई संकीर्ण विचार नहीं है, यह तो वह विशाल वटवृक्ष है जिसकी छाया में हर वर्ग सुरक्षित है। आज जो लोग हमें जातियों के नाम पर लड़ाने की साजिश रच रहे हैं, उन्हें जवाब देने का समय आ गया है। याद रखिए अगर हम बिखरे रहे तो कमजोर पड़ जाएंगे और अगर एक रहे तो दुनिया की कोई भी ताकत हमें झुका नहीं सकती। अस्पृश्यता और ऊंच-नीच हमारे धर्म का हिस्सा नहीं, बल्कि एक सामाजिक कुरीति है जिसे हमें आज ही जड़ से उखाड़ फेंकना है। एक ही घाट का पानी, एक ही मन्दिर का पूजन और एक ही हिन्दू समाज का अटूट बंधन ही भारत को पुन: विश्व गुरु बनाएगा। आज इस मंच से मैं आह्वान करता हूं कि उठो! संगठित हो! और गर्व से कहो कि हम हिंदू हैं। क्योंकि हमारी एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और यही आने वाली पीढ़ियों का सुरक्षा कवच है। शाम को भारत माता की महाआरती के पश्चात विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। मंच संचालन जितेन्द्र कौरव ने किया। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में माताएं, बहिनें, युवा, बुजुर्ग व अन्य लोग मौजूद रहे।


