भिण्ड, 06 जनवरी। लहार जनपद की कुरथर पंचायत के अंतर्गत भांपर गांव की गौशाला में प्रबंधन की लापरवाही के चलते एक माह के अंदर लगभग दो दर्जन से ज्यादा गायों की मौत हो चुकी है। गौशाला प्रबंधन द्वारा गायों की मौत के साक्ष्य छिपाने के लिए गायों के शव कंटीले झाड़ों में फिकवा दिए और कुछ को गौशाला के पीछे ही गड्डों में दफन करवा दिया गए। मौत होने के बावजूद भी प्रशासन द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
यहां बता दें कि गौशालाओं में गायों के रखरखाव के लिए शासन द्वारा किए जा रहे दावे कागजों में भले ही कुछ कह रहे हों, लेकिन जमीनी स्तर पर वह पूरी तरह से खोखले साबित हो रहे हैं। आवारा गौवंश को रखने के लिए शासन द्वारा भांपर गांव में 100 की क्षमता वाली एक गौशाला का निर्माण कराया गया था। लेकिन वर्तमान में इस गौशाला में आधा सैकड़ा से कम गौवंश ही रखा जा रहा है। भांपर गौशाला में विगत एक माह के अंदर भूख और सर्दी के कारण दो दर्जन से ज्यादा गौवंश की मौत हो चुकी है। गौशाला में हालात इतने बदतर हैं कि गौवंश को खाने के लिये हरा चारा तो दूर भूसा भी नसीब नहीं हो रहा है। गौवंश को सूखे हुए करब के डण्ठल खाकर अपनी भूख मिटानी पड़ रही है। जिसके परिणामस्वरूप भूख, कुपोषण और कमजोरी के चलते लगातार गौवंश की मौत हो रही है और प्रबंधन समिति बीमारी के नाम पर गौवंश की मौत से पल्ला झाड़ती हुई नजर आ रही है।
जब मंगलवार को गौशाला का निरीक्षण किया तो अलग ही मंजर देखने को मिला। गौशाला का बाहर से दरवाजा बंद था और कोई भी जिम्मेदार या चौकीदार गौशाला में मौजूद नहीं था, वहीं कुछ गायों को खाने के लिए सूखी करब के डण्ठल डाले गए थे। गायों के पीने के लिए बनाए गए बड़े टैंक में काफी दिन पुराना दूषित और काफी ठण्डा पानी भरा हुआ था, जिसमें काफी ज्यादा मात्रा में काई जम चुकी थी।गौशाला के चारों तरफ अंदर और बाहर सिर्फ गोबर ही गोबर नजर आ रहा था।
गौवंश की हड्डियां बिखरीं मिलीं
गौशाला के पीछे बड़े-बड़े गड्डे करवाकर अधिकांश गायों को दफन करवा दिया गया, जबकि उनका न तो पोस्ट मार्टम करवाया गया और न ही प्रशासन को जानकारी दी गई। वहीं कुछ गायों को पीछे कंटीले झाड़ों में फेंक दिया गया था, जहां आवारा श्वान उनका पूरी तरह से मांस खा चुके थे और सिर्फ हड्डियों का ढांचा ही नजर आ रहा था। चारों तरफ हड्डियां ही हड्डियां फैली हुई थीं।
शिकायत के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
स्थानीय गांव वालों का कहना है कि हमारे द्वारा कई बार गौशाला प्रबंधन को इस बारे में अवगत कराया गया, मगर उसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। गौशाला में बंद गौवंश समुचित एवं पौष्टिक आहार न मिलने से कुपोषण का शिकार हो चुका है। उनकी हड्डियां स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं। गायों के शरीर में ताकत न होने से कई गायें खड़ी होने में भी असमर्थ हो गई हैं। पूछे जाने पर गौशाला संचालक का कहना है कि बीमारी के कारण गायों की मौत हुई है।
24 घण्टे आती रहती है बदबू
ग्रामीण बताते हैं मृत गौवंश को गौशाला प्रबंधन द्वारा गौशाला के पीछे ही फेंक दिया जाता है। जिसकी वजह से वहां और आस-पास के इलाके में लगातार बदबू आती रहती है। ऐसे में वहां से आवागमन काफी मुश्किल हो गया है। इसके अलावा गौशाला के आस-पास दिनभर आवारा श्वानों का जमावड़ा लगा रहता है। गायों का उपचार करने पहुंचे डॉ. अवनीश शर्मा का कहना है कि गायों में किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं पाई गई। समुचित आहार न मिलने से एवं व्यवस्थाओं का अभाव होने से भूख एवं सर्दी के कारण गायों की मौत हुई है।
नायब तहसीलदार ने किया निरीक्षण
गौशाला में हो रही गौवंश की मौत की शिकायत मिलने के बाद नायब तहसीलदार महेश माहौर शनिवार को गौशाला पहुंचे और वहां का जायजा लिया तो मौके पर नायब तहसीलदार को भी अंदर एक गाय मृत मिली। नायब तहसीलदार का कहना है कि गौशाला में गौवंश की हालत बहुत खराब है, इसकी रिपोर्ट बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजेंगे।
इनका कहना है:
‘‘गौशाला में आखिर इतनी गायों की मौत कैसे हुई, इसकी जांच करवाई जाएगी।”
सुनील कुमार दुबे, सीईओ जिला पंचायत भिण्ड


