– मुरलीपुरा मण्डल में विशाल हिन्दू सम्मेलन आयोजित
भिण्ड, 05 जनवरी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने पर शताब्दी वर्ष के अवसर पर सर्व हिन्दु समाज द्वारा मुरलीपुरा मण्डल में विशाल हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं भारत माता की आरती के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रपति ओझा ने अपने उदबोधन में कहा कि ‘हिन्दू भाव जब जब भूले, विपत्ति आई महान, भाई छूटे धरती खोई मिटे धर्म संस्थानÓ। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज को सशक्त और सामर्थ्यवान बनना होगा, हिन्दू समाज को यात्रियों को बांटने का षड़यंत्र रचा गया और हमारे धार्मिक स्थलों को सुनियोजित तरीके से टारगेट बनाया गया, ऐसी विधर्मी ताकतों का उद्देश्य समाज की एकता को कमजोर करना है। हमारा हिन्दू धर्म तो हमारे देश की जन-जन की आत्मा में बसता है। हिन्दू धर्म और सनातन संस्कृति दोनों एक दूसरे के पहलू है। हम अपने मन्दिरों में किसी धर्म विशेष की जय नहीं बोलते हम बोलते हैं धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो। रावण जैसी शक्ति सिर्फ अधर्म और अन्य की वजह से नष्ट हुई। संघ एवं संत समाज हिन्दू धर्म को जागृत करने का, संगठित करने का और समाज में समरसता फैलाने का कार्य निरंतर रूप से करता रहा है। राष्ट्र सर्वोपरि है। व्यक्ति निर्माण से ही समाज निर्माण होता है और समाज निर्माण से ही राष्ट्र निर्माण संभव है। भारत का भविष्य उसकी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने में निहित है। जब जब हिंदू समाज जागा है और संगठित हुआ है भारत देश और उसके गांव सशक्त और उन्नत हुए हैं, संघ अपनी स्थापना की शताब्दी वर्ष को मना रहा है। इस 100 वर्ष के काल में संघ का हिन्दू समाज के उत्थान और संगठन में अभूतपूर्व योगदान रहा है।
अतिथि के रूप में उपस्थित हरगोबिन्द शास्त्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज सामाजिक समरसता हिन्दू समाज की एकता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं, एक पनघट एक मरघट और एक पूजा स्थल पर सभी भेद समाप्त हो हो जाते हैं। संतुलित पर्यावरण, नागरिक कर्तव्यों के प्रति हमारी सजगता, कुटुम्ब प्रबोधन के लिए संयुक्त और संस्कारित परिवार एवं स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करेंगे, तभी भारत समर्थक और आत्मनिर्भर बन सकेगा। इस हिन्दू सम्मेलन में 108 रघुवीर दास महाराज, कमलेश बाबाजी, समाजसेवी तेजसिंह शखवार मंचासीन रहे। हिन्दू सम्मेलन में ग्रामीण अंचल से सैकड़ों की संख्या में मातृशक्ति एवं जन समुदाय की भागीदारी रही। कार्यक्रम के समापन पर प्रसादी भंडारे का आयोजन भी किया गया।


