– पूर्व सरपंच के भ्रष्टाचार की खुली पोल
मेहगांव, 31 दिसम्बर.मनीष दुबे।
न्यायालयीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत भिण्ड सुनील दुबे ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। उन्होंने तहसीलदार परगना मेहगांव को निर्देश दिए हैं कि ग्राम पंचायत पचैरा के तत्कालीन सरपंच पूनम त्यागी पत्नी निशांत बंटी त्यागी, तत्कालीन सचिव रामबरन और ग्राम रोजगार सहायक उमेश राजावत से विभिन्न निर्माण कार्यों की बकाया 86.03 लाख रुपए राशि वसूल की जाए। यह राशि मनरेगा योजना के तहत अनियमित कार्यों से जुड़ी है।
यह मामला जनपद पंचायत मेहगांव की ग्राम पंचायत पचैरा से संबंधित है। यहां नाली निर्माण रामसेवक राठौर के मकान से नाले की ओर, नाला निर्माण अखिलेश के खेत से मुन्ना के खेत की ओर, नाला निर्माण जय नारायण बौहरे के मकान से नाले की ओर, नाला निर्माण नाले से तालाब की ओर, नाला निर्माण नरेश के खेत से तालाब की ओर, नाला निर्माण स्कूल से डग टैंक की ओर, नाला निर्माण यात्री प्रतिक्षालय से नाले की ओर, बाउण्ड्रीवाल निर्माण पीआईबीआई पचैरा मेहगांव और नाला निर्माण बहारपुरा में कुल 86.03 लाख रुपए के कार्य हुए थे। इन कार्यों की राशि बकाया है। जनपद पंचायत गोहद से यह न्यायालयीन प्रकरण जिला पंचायत भिण्ड पहुंचा। इसमें मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 92 के तहत पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। अत: तहसीलदार को धारा 92 के अनुसार आवश्यक खर्चों सहित यह राशि भू-राजस्व के बकाये के रूप में वसूलने का आदेश दिया गया। सी-2 पंजी में मांग कायम कर प्रकरण जिला पंचायत भिण्ड भेजने के भी निर्देश हैं।
अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा/ सहायक लेखा अधिकारी जनपद पंचायत मेहगांव के अनुसार, पचैरा में मनरेगा मार्गदर्शिका के विपरीत गैर-अनुमत श्रेणी के कार्य कराए गए। इससे 86.03 लाख रुपए आहरित हो गए। एडीशनल कमिश्नर मनरेगा परिषद भोपाल ने निरीक्षण में असंतोष जताया था। प्रकरण की शुरुआत 17 फरवरी 2025 को हुई, जब धारा 89 के तहत पूर्व सरपंच, पूनम पत्नी निशांत बंटी त्यागी सचिव और ग्राम रोजगार सहायक को सूचना पत्र जारी किया गया। 8 अप्रैल 2025 को तत्कालीन सचिव और ग्राम रोजगार सहायक ने समय बढ़ाने की मांग की, जबकि सरपंच पूनम त्यागी अनुपस्थित रहीं। 28 अक्टूबर 2025 को धारा 89 का दूसरा सूचना पत्र जारी हुआ। 6 नवंबर 2025 को सुनवाई की गई, लेकिन सभी आरोपी अनुपस्थित रहे। दो सूचनाओं के बावजूद कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर प्रकरण धारा 92(1) में दर्ज कर नोटिस जारी किया गया।
18 नवंबर 2025 को धारा 92(1) के तहत प्रकरण दर्ज हुआ। तत्कालीन सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायक को सूचना दी गई। 25 नवंबर 2025 की सुनवाई में सचिव और ग्राम रोजगार सहायक उपस्थित हुए, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। सरपंच पूनम फिर अनुपस्थित रहीं। इससे स्पष्ट है कि उनके पास प्रकरण पर कुछ कहने को नहीं। इसलिए धारा 92(1) के तहत अधिरोपित वसूली यथावत रखी गई यह आदेश पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने वाला है। मनरेगा जैसे योजनाओं में गैर-अनुमत कार्यों से सार्वजनिक धन का दुरुपयोग रोकना जरूरी है। तहसीलदार को शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश हैं, जिससे बकाया राशि राज्य कोश में जमा हो सके। यह मामला अन्य पंचायतों के लिए चेतावनी है कि नियमों का उल्लंघन महंगा साबित होता है।
इनका कहना है:
”वरिष्ठ कार्यालय से आवेदन प्राप्त हुआ प्रकरण दर्ज के नोटिस भेजे गए हैं। पूनम त्यागी सरपंच व सचिव रामबरन उमेश राजावत ग्राम पंचायत पचेरा पर कार्रवाई की जा रही है।”
राजकुमार नागोरिया, तहसीलदार मेहगांव


