भिण्ड, 30 दिसम्बर.मनीष दुबे।
बच्चों के सुरक्षित भविष्य और उन्हें जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। इसी उद्देश्य से मंगलवार को विकास खण्ड रौन में जीरो डोज बच्चों को लेकर यूनिसेफ के सहयोग से मप्र वॉलेंटरी हेल्थ एसोसिएशन (एमपीवीएचए) द्वारा उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें डॉ. अंकित चौधरी, बीपीएम रामप्रकाश शर्मा, बीसीएम सरिता शर्मा, कोल्ड चेन हैंडलर कुलदीप शर्मा, धर्मगुरु, प्रभावशाली जन सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जीरो डोज श्रेणी में आने वाले बच्चों तक टीकाकरण सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना रहा।
इस अवसर पर जिला समन्वयक डॉ. वरुण शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि जीरो डोज वे बच्चे होते हैं जिन्हें जन्म से एक वर्ष की आयु तक पेंटावेलेंट टीके की एक भी खुराक नहीं मिली होती। ऐसे बच्चों की पहचान कर समय पर टीकाकरण कराना वर्तमान में सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जब समाज के नेतृत्वकर्ता और धर्मगुरु टीकाकरण का समर्थन करते हैं, तो समुदाय में सकारात्मक संदेश जाता है और जागरूकता तेजी से बढ़ती है। आज भी कई परिवार अज्ञानता, भय और पुराने मिथकों के कारण बच्चों का टीकाकरण नहीं करवा रहे हैं, जिससे बच्चों का भविष्य गंभीर खतरे में पड़ सकता है।
एमपीवीएचए-यूनिसेफ के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर गणेश शाक्य ने टीकाकरण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नियमित टीकाकरण बच्चों को खसरा, रूबेला, गलघोंटू, काली खांसी, टिटनस, पोलियो, हेपेटाइटिस-बी, टीबी, रोटावायरस सहित 12 से अधिक जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते जीरो डोज बच्चों को टीकाकरण के दायरे में नहीं लाया गया, तो भविष्य में यह एक गंभीर जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है। कार्यशाला के दौरान धर्मगुरुओं से विशेष अपील की गई कि वे अपने प्रवचनों, धार्मिक आयोजनों और सामाजिक संवाद के माध्यम से टीकाकरण को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करें और समुदाय को बच्चों के टीकाकरण के लिए प्रेरित करें।


