– मीसाबंदी डॉ. रामकृष्ण सिंह जादौन की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित
भिण्ड, 18 दिसम्बर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं मीसाबंदी रहे डॉ. रामकृष्ण सिंह जादौन की पुण्यतिथि पर एक सादे कार्यक्रम में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य जनों ने स्व. डॉ. रामकृष्ण सिंह जादौन के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि डॉ. रामकृष्ण सिंह जादौन अटेर विधानसभा से ऐसे समय चुनाव लड़े जब भाजपा से लड़ना हार की गारंटी थी, किन्तु आज के समय में भाजपा से लड़ना जीत की गारंटी है। डॉ. जादौन जब अटेर विधानसभा सीट से भाजपा से चुनाव लड़े थे, तब ग्वालियर अटल जी, भिण्ड से बसुंधरा राजे चुनाव हार गए थे, देश में बीजेपी को लोकसभा में 2 सीट 1984 में मिली थी, डॉ. जादौन को भी चुनाव हारना पड़ा। डॉ. जादौन का त्याग, तपस्या और समर्पण में भिण्ड जिले में नाम था, डॉ. जादौन ने जनसंघ से भाजपा तक लम्बा सफर तय किया। जब 1980 में भाजपा का जन्म हुआ तब वह बुरे दौर से गुजर रही थी, उस समय लोगों की पहिली पसंद कांग्रेस थी, भाजपा में चुनाव लड़ना हार की गारंटी थी, किन्तु ऐसे भाजपा में नेता थे वो कांग्रेस की नीतियों का जम कर विरोध करते थे तथा एक विचारधारा में ईमानदारी से काम करते थे, सत्ता हासिल करना नहीं था, विचार धारा को आगे बढ़ाना था, ऐसे हजारों लाखों नेताओं के त्याग के कारण आज भाजपा उच्च से शिखर पर है, भाजपा देश की जनता की पहिली पसंद बन चुकी है।
डॉ. जादौन कहते थे बड़ी लखीर करने के लिए कुछ न कुछ खोना पड़ेगा. पद और प्रेतिष्ठा दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। डॉ जादौन आपातकाल में जेल में रहे, कांग्रेस की नीतियों के विरोध में 50 से अधिक बार जेल में गए। घर, परिवार को कभी भी लाभ नहीं पंहुचाया। डॉ. जादौन पार्टी की गाइड लाइन पर हमेशा काम करते थे, आज भी भाजपा परिवारवाद से दूरी बनाए हुए है। डॉ. जादौन का उस समय भाजपा में भिण्ड जिले में बड़ा नाम था, वो चाहते तो अपने लड़के को भाजपा के टिकट पर विधायक बनवा सकते थे, किंतु उन्होंने ऐसा नहीं किया. डॉ. जादौन भाजपा के कार्यकर्ताओं की लड़ाई अंदर और बाहर लड़ते थे।


