भिण्ड, 17 दिसम्बर। नहर में पानी न आने से किसानो के माथे पर चिंता की लकीरे स्पष्ट दिख रही हैं और किसान बहुत परेशान हैं। खासकर गेहूं, सरसों और मटर जैसी रबी फसलों की सिंचाई के लिए पानी की भारी किल्लत है, जिससे फसलें सूख रही हैं और इस बार अक्टूबर-नवंबर माह में पलेवा के लिए नहरों में पानी नहीं आया। किसानों ने वर्षा के पानी के नमी में ही फसलों कि बुवाई की थी, नहर में पानी आने में देरी हो रही है, अधिकांश किसान नहर के पानी पर ही आश्रित है, उनके पास सिंचाई का कोई दूसरा साधन नहीं है, जिससे किसानों की फसलों में नुकसान हो रहा है, किसान प्रशासन से जल्द पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं, वरना किसान आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
बता दें कि किसानों की खरीब की फसलें अत्याधिक वर्षा होने से पहले ही बर्बाद हो चुकी है, अब किसान रवि की फसल पर ही निर्भर है, लेकिन प्रशासन इसकी कोई चिंता नहीं दिखाई दे रही है। प्रशासन ने नहर तो छोड़ी थी पर तीन-चार दिन चलने के बाद उसे बंद कर दी गई है, जिससे किसानों की फसलों में आधा अधूरा पानी लगा रह गया है।
किसानों की मुख्य समस्याएं
नहरों में पानी न होने के कारण गेहूं, सरसों, मटर जैसी रबी फसलें सूखने लगी हैं, जिससे पैदावार घटने की आशंका है। इस बार नहर न आने के कारण बिना पलेवा के ही बुवाई करनी पड़ी, खेतों में कम नमी के कारण फसले सुख रही है और अधिकारियों की अनदेखी के चलते किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, बुवाई के समय खाद का संकट सिंचाई के समय नहरों में पानी न आना, अनाज बिक्री के समय व्यापारियों की मनमानी जिससे किसान निराश हो जाता है। किसानों की मांग है कि तत्काल नहरों में पानी छोड़ा जाए ताकि हम किसानों की फसलें बर्बाद न हों।
इनकी सुनिये
”पानी आने में अभी चार पांच दिन लग जाएंगे, 20 तारीख के बाद ही किसानों को पानी मिल पाएगा।”
शिवचरन माहौर, एसडीओ सिंचाई विभाग”किसान की कोई नहीं सुनता, पहले खाद के लिए भूखे प्यासे दिन दिन भर लाइन में लगे रहे, तब जाकर खेती बो पाई, अब पानी न मिलने से फसल सुख रही है।”
मोहन सिंह, किसान

