ब्राह्मण समाज ने धूम धाम से मनाया सप्तचिरंजीवी भगवान परशुराम का जन्मदिवस
11 मई को निकलेगा भव्य चल समारोह
पण्डित दीपक चौधरी 📞9826231755
भिण्ड ब्यूरो – अखतीज, जिसे अक्षय तृतीया भी कहा जाता है, हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह तिथि वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन को शुभ माना जाता है क्योंकि पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन किए गए कार्य अक्षय फल देते हैं, जिसका अर्थ है कि वे हमेशा के लिए अच्छे परिणाम लाते हैं.
*आखतीज को कई कारणों से मनाया जाता है*
भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्मदिन,
कई लोग इस दिन को परशुराम के जन्मदिवस के रूप में भी मानते हैं.
त्रेता युग का आरंभ -मान्यता है कि इस दिन से त्रेता युग की शुरुआत हुई थी.
युधिष्ठिर को अक्षय पात्र की प्राप्ति – इस दिन भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को अक्षय पात्र दिया था, जो कभी खाली नहीं होता था.
मां गंगा का धरती पर आगमन – कुछ लोग इस दिन को मां गंगा के धरती पर अवतरित होने के रूप में भी मानते हैं.
शुभ कार्यों के लिए स्वयंसिद्ध मुहूर्त – अक्षय तृतीया एक स्वयंसिद्ध मुहूर्त मानी जाती है, जिसका अर्थ है कि इस दिन कोई भी शुभ कार्य बिना किसी मुहूर्त के किया जा सकता है.
इसलिए, आखतीज को एक शुभ और महत्वपूर्ण दिन माना जाता है क्योंकि इस दिन किए गए कार्य हमेशा अच्छे परिणाम लाते हैं और यह दिन कई धार्मिक और पौराणिक घटनाओं से जुड़ा हुआ।इस दिन भगवान विष्णु ने मानव शरीर मे प्रथम अवतार परशुराम के नाम से लिया था ।

परशुराम भगवान विष्णु के 6वें अवतार माने जाते हैं । उनके पिता का नाम महर्षि जमदग्नि तथा माता का नाम रेणुका था। परशुराम के चार बड़े भाई थे। एक दिन क्रोधवश महर्षि जमदग्नि ने पुत्रो को माँ का वध करने का आदेश दिया परशुराम के बड़े भाई रुक्मवान, सुषेणु, वसु और विश्वावसु वारी वारी से सभी ने माँ का वध करने से इन्कार कर दिया । इससे नाराज होकर महर्षि जमदग्नि ने उन्हें श्राप दे दिया और उनकी विचार शक्ति को खत्म कर दिया। तभी वहां परशुराम आ गए। उन्होंने पिता के आदेश का पालन करते हुए अपनी मां का सर काट दिया। यह देखकर महर्षि जमदग्नि बहुत प्रसन्न हुए और परशुराम को वर मांगने के लिए कहा।

तब परशुराम ने 3 वरदान मांगे। पहला माता रेणुका को पुनर्जीवित करने और दूसरा चारों भाइयों को ठीक करने का वरदान मांगा।
तीसरे वरदान में उन्होने मांगा कि उन्हे कभी पराजय का सामना न करना पड़े और उनको लंबी आयु प्राप्त हो।
युद्ध की कला में माहिर
भगवान परशुराम ने भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे कई सूर वीरों को शिक्षा दी। कहा जाता है कि परशुराम अजर अमर हैं ,वह भगवान कल्कि को भी युद्ध की नीतियां सिखाएंगें, जो कलयुग में भगवान विष्णु के अवतार होगें।

भगवान परशुराम को क्यों आता था ज्यादा गुस्सा
महर्षि भृगु के पुत्र ऋचिक का विवाह राजा गाधि की पुत्री सत्यवती से हुआ था। विवाह के बाद सत्यवती ने महर्षि भृगु से अपने व अपनी माता के लिए पुत्र की याचना की। तब महर्षि भृगु ने सत्यवती को दो फल दिए और कहा कि ऋतु स्नान के बाद तुम गूलर के वृक्ष का तथा तुम्हारी माता पीपल के वृक्ष का आलिंगन करने के बाद ये फल खा लेना। लेकिन सत्यवती व उनकी मां ने इस नियम का पालन नहीं कर पाई। यह बात महर्षि भृगु को पता चल गई। तब उन्होंने सत्यवती से कहा कि तूने गलत वृक्ष का आलिंगन किया है। इसलिए तेरा पुत्र ब्राह्मण होने पर भी क्षत्रिय गुणों वाला पेदा होगाऔर तेरी माता का पुत्र क्षत्रिय होने पर भी ब्राह्मण गुणों वाला होगा।
तब सत्यवती ने महर्षि भृगु से प्रार्थना की कि मेरा पुत्र क्षत्रिय गुणों वाला न हो भले ही मेरा पौत्र (पुत्र का पुत्र) को ऐसे गुण वाला हो। उन्होने यह बात मान ली।
कुछ समय बाद सत्यवती के गर्भ से जमदग्रि मुनि ने जन्म लिया। इनका विवाह रेणुका से हुआ। मुनि जमदग्रि के 5 पुत्र हुए। उनमें सबसे छोटे परशुराम थे।

भिण्ड परशुराम मन्दिर पर हुआ अभिषेक व सामूहिक सुंदरकांड पाठ का आयोजन
मीडिया प्रभारी दीपक चौधरी ने प्रेस को बताया कि इसी उपलक्ष्य में बायपास रोड स्थित भगवान परशुराम मन्दिर भिण्ड पर ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष पण्डित सतीष जोशी और परशुराम सेना के अध्यक्ष देवेश शर्मा सहित समाज के गणमान्य नागरिकों ने प्रातः बेला में पंडित गुरुदत्त शास्त्री ,पंडित पवनकृष्ण शास्त्री द्वारा वैदिक मंत्रों द्वारा भगवान परशुराम का पंचामृत से अभिषेक किया तदोपरांत श्रंगार कर सामूहिक सुन्दरकाण्ड पाठ कर महाआरती की गई अंत मे सभी को प्रसादी वितरित कर 11 मई को होने वाले भव्य चल समारोह में बढ़ चढ़कर भाग लेने की अपील की गई ।
कार्यक्रम में पण्डित सतीश जोशी अध्यक्ष ब्राह्मण महासभा, देवेश शर्मा सोनू अध्यक्ष परशुराम सेना, पंडित माधौराम शर्मा जी, अनोखेलाल तिवारी जी, डॉ जगदंबा प्रसाद जी, बाबा भगवान दास सेंथिया, संदीप मिश्रा जी, राजमणि शर्मा दीपक चौधरी, अनिल बौहरे, संजय पाठक, चैतन्य शर्मा, राजेश समाधिया, दीपक शर्मा पार्षद, विष्णु कुमार शर्मा, राकेश शर्मा, मनोज जोशी कृष्णा पुरोहित, रामनरेश चौधरी आशुतोष शर्मा नंदू, नमो जोशी, प्रतीक पांडे, सुनील चौधरी, सूरज बरुआ, आचार्य पवन कृष्ण शास्त्री प्रचार गुरुदत्त शास्त्री ,गौरव दुबे, राजीव बरुआ, आदित्य पुरोहित, मुकेश शर्मा, गणेश भारद्वाज, आशीष महेरे, जयप्रकाश शर्मा, अजय भारद्वाज, ब्रजेश कांकर, कमलेश सैंथिया, मनीष पुरोहित पार्षद, अभिषेक पुरोहित, कौशल शर्मा जी, रामकेश भारद्वाज, सुरेश चंद दुवे, संतोष त्रिपाठी, मार्कण्डेय शर्मा, विक्रम उपाध्याय, पी सी शर्मा, सौरभ बौहरे, मनोज पुरोहित, सूरज पुरोहित आदि सैकड़ो लोग शामिल हुए ।


