वगैर चम्बल प्रदेश गठन के चम्बलांचल का विकास संभव नहीं – चौबे
सुख, शांति, विकास का संदेश लेकर घर-घर पहुंच रही है चम्बल कलश रथयात्रा
पण्डित दीपक चौधरी 📞9826231755
भिण्ड । राष्ट्रीय हनुमान सेना पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पृथक चम्बल प्रदेश गठन की माँग के संयोजक नरसिंह कुमार चौबे ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि चम्बल नदी का उदय मालवा मध्यप्रदेश में हुआ है। मालवा से चली चम्बल नदी राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा पर बाँधों का निर्माण होने से किसानों की समस्याओं का निदान हुआ और किसान खुशहाल हुआ और चम्बल अंचल में आकर चम्बल नदी का अस्त हुआ। यहां पर चम्बल नदी का पानी ऐसा है कि किसान वर्षा के पानी पर निर्भर रहता है जबकि अचल मे पाच-पांच नदियों का जलसंगम है। क्वारी, चम्बल, यमुना, सिन्ध और पहुज जलसगम पर पचनदा बाँध की परियोजना 25 अक्टूबर 1983 में बनाई गई थी। केन्द्र सरकार से योजना के लिए लाखों अरबो रूपये का बजट आता रहा है, लेकिन पचनदा बाँध परियोजना पर काम आज दिनांक तक शुरू नहीं हो पाया है।
चौबे ने बताया कि अगर पचनदा बाँध का निर्माण हो जाता है तो चम्बल अचल में भूमि कटाव कम होता. जमीन का वाटर लेवल कम नहीं होता। सिंचाई, बिजली समस्या का समाधान होता, चम्बल अंचल में नदियों का पानी ऐसा है कि किसान वर्षा पर निर्भर रहता है और किसान कर्ज में डूबा रहता है। किसान खुशहाल होगा तो देश खुशहाल होगा ।
चौबे ने बताया कि चम्बालंचल की समस्या और निदान के मुख्य बिन्दुओं को लेकर राष्ट्रीय हनुमान सेना पार्टी द्वारा 27 दिसम्बर 1999 से पृथक चम्बल प्रदेश गठन की मांग की गई है। इसमें उत्तरप्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती अन्तिम छोर पर 22 जिलों को मिलाकर जनता के बल पर पृथक चम्बल प्रदेश गठन की माग की गई है। उत्तरप्रदेश से आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, जालौन, झांसी और ललितपुर । मध्यप्रदेश से गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, दतिया, ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर और भिण्ड। राजस्थान से धौलपुर, करौली, सवाई माधौपुर, कोटा, बारा, झालावाड़ जिले शामिल है।
चौबे ने बताया कि उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान के प्रस्तावित 22 जिलों में यह चम्बल कलश रथयात्रा प्रदेश गठन होने तक जारी रहेगी। उन्होने कहा कि वगैर चम्बल प्रदेश गठन के चम्बलांचल का विकास संभव नहीं है। सुख, शांति, विकास का संदेश लेकर निकल रही चम्बल कलश रथयात्रा घर-घर पहुंच रही है।


