– मां मंगला देवी मेला लहार में अभा कवि सम्मेलन आयोजित
भिण्ड, 25 मई। नगर पालिका लहार जिला भिण्ड द्वारा मंगला देवी मेला में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजिय किया गया। जिसका शुभारंभ नगर पालिका लहार के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रमाशंकर शर्मा, संयोजक जितेन्द्र त्रिपाठी अमित, समस्त पार्षदगण तथा मंचस्थ कवियों द्वारा मां मंगला देवी तथा सरस्वती पूजा अर्चन से किया।
राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित कवि डॉ. सुनील त्रिपाठी निराला ने प्रारंभिक संचालन में सरस्वती वंदना के रूप में कवित्त प्रस्तुत करते कहा कि भारती के लाल सुनो भारती पुकारती है, आन बान शान की निशानी हमें चाहिए। भारतीय नारियों से भारती अपील करे, पन्नाधाय वाली वो कहानी हमें चाहिए।। इसके उपरांत कवि सम्मेलन के संचालन की बागडोर महाकाल की नगरी उज्जैन से पधारे हास्यरस के वरेण्य कवि दिनेश दिग्गज के हाथों में सौंप दी गई, जिन्होंने कवि सम्मेलन का शानदार संचालन किया। हास्य रस के धुंआधार कवि जॉनी बैरागी धार, नेता जी लपेटे में टीवी सीरियल वाले गौरव चौहान इटावा, बालकवि वेद पस्तोर टीकमगढ़, सुमित्रा सरल प्रतापगढ़, वीररस के राम भदावर जयपुर, श्रृंगार की कवयित्री डॉ. अंजना कुमार कानपुर, वीणा खुशबू दतिया ने अपनी ओजपूर्ण, हास्य एवं श्रृंगार रस की कविताओं से श्रोताओं को देर रात तक खूब हंसाया गुदगुदाया तथा सोचने का अवसर प्रदान किया। कवि सम्मेलन में हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने तालियों की के गड़गड़ाहट के साथ कवियों का उत्साहवर्धन किया।
गौरव चौहान ने अपनी कविता में कहा कि हमारा जिस्म पत्थर है, कलेजा आसमानी है, हमारे खून का लहजा गरम है, खानदानी है। वहीं कवि राम भदावर ने अपनी कविता में कहा कि यही लड़के हैं जो सरहद पर जाकर खून देते हैं यही लड़के हैं जो सबसे ऊपर हिंदुस्तान रखते। इसी के साथ अन्य कवियों ने भी अपनी कविताओं की प्रस्तुति दी। टीकमगढ़ से आए बाल कवि वेद पस्तोर ने अपनी चर्चित हास्य कविता- आज-कल की मम्मियां भी गजब ढा रहीं… पढकर पंडाल को ठहाकों से गूंजा दिया। इसके बाद कानपुर की श्रृंगाररस की कवयित्री डॉ. अंजना कुमार ने सांस सांस महकता गुलाब हो जाए, रात-रात ना रहे शराब हो जाए और हाथों में हाथ जब उनका हो तो चांद भी बदहवास हो जाए पढ़कर माहौल को श्रृंगार की ओर मोड़ा। कवि सम्मेलन को ओज की ऊंचाई पर ले जाते हुए जयपुर के वीर रस कवि राम भदावर ने बुलंद आवाज में देश के स्वाभिमान पर काव्य पाठ करते हुए कहा-जिस धरती पर पग रखते ही हिस्से में यह गौरव आया, इस गौरव के चरणों में मैने सारा विश्व झुका पाया, यह गौरव सुनो मन का है, यह गौरव स्वाभिमान का है।
इसके बाद धार के कवि जानी बैरागी ने सनातन की महिमा और विज्ञान पर अध्यात्मिक पाठ करते हुए कहा-सनातन की ताकत देखना है तो वृंदावन चलो, जहां पूरी दुनिया का विज्ञान शर्मिंदा है कि संत प्रेमानंद बिना किडनी के कैसे जिंदा है। मेले में लगी दुकानों की सजावट अत्यंत आकर्षण का केन्द्र रही।


