– राकेश अचल
पर्यावरणविद् और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने स्वघोषित कॉकरोच (तिलचट्टा) जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में चल रहे ऑनलाइन कॉकरोच आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने खुद को मानद कॉकरोच बताते हुए सरकार से अपील की कि वह युवाओं की डिजिटल अभिव्यक्ति को दबाने के बजाय उनके द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर ध्यान दें।
सोनम वांग्चुक को मैं गांधीवादी सत्याग्रही मानता रहा हूं, इसलिए जब उन्हें रासुका में गिरफ्तार कर चार महीने जेल में रखा गया था, तब मैंने उसके मुखालफत में जमकर लिखा था। लेकिन अब सोनम को कॉकरोच जानता पार्टी के समर्थन में खड़ा देखकर मुझे लगता है कि सोनम ने लोकतांत्रिक संघर्ष का रास्ता छोड़ दिया है। कोकरोच जनता पार्टी के इस ऑनलाइन अभियान में व्यंग्य के तौर तथा दृढ़ता एवं असहमति के प्रतीक के तौर पर तिलचट्टे की तस्वीर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस अभियान ने हाल के दिनों में तब ध्यान आकर्षित किया, जब इसके संस्थापकों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कार्रवाई की शिकायत की है, जिसमें अकाउंट निलंबन और हैकिंग के आरोप शामिल हैं। यह आंदोलन बेरोजगारी, परीक्षा प्रश्नपत्र लीक और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर केन्द्रित है।
वांगचुक अपनी रिहाई के बाद अचानक शांत हो गए हैं, जबकि केन्द्र सरकार ने उन सभी मांगों को एक तरह से ठुकरा दिया है जिनके लिए वे आंदोलन कर रहे थे। सोनम वांग्चुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत 26 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए उग्र प्रदर्शनों के बाद हुई। सरकार ने उन पर जन व्यवस्था बिगाड़ने और भड़काऊ माहौल बनाने के आरोप लगाए थे। उन्हें करीब छह महीने तक हिरासत में रखा गया और राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल में रखा गया था। केन्द्र सरकार ने 14 मार्च 2026 को एन एस ए निरस्त किया और उसी दिन उनकी रिहाई हुई।
रिहाई के बाद फिलहाल वे फिर से लद्दाख मुद्दों पर सक्रिय हैं, किंतु उनकी सक्रियता की धार मर चुकी है। लद्दाख को राज्य का दर्जा दिलाने, छठी अनुसूची लागू कराने, हिमालयी पर्यावरण संरक्षण और केन्द्र-लद्दाख संवाद बहाल कराने के लिए जनसभाएं और शांति अभियानों में लगे हैं किंतु वे संवाद से समाधान की बात केन्द्र से नहीं कर सके। केन्द्र ने दो टूक कह भी दिया कि लद्दाख को राज्य का दर्जा नहीं दिया जाएगा।
लंबी चुप्पी के बाद सोनम ने एक ऐजेंसी को दिए साक्षात्कार में कहा कि हमारे युवाओं की ऐसी रचनात्मक अभिव्यक्ति चिंता या भय की कोई बात नहीं है। सरकार को यह संदेश समझना चाहिए- संदेशवाहक को मत मारो। अगर हम संदेशवाहक को मार देंगे, तो संदेश खत्म नहीं होगा। जब वांगचुक से पूछा गया कि क्या वह औपचारिक रूप से आंदोलन में शामिल होंगे, तो उन्होंने कहा कि मुझे कई जगहों से इस विषय पर बोलने के लिए कहा गया है। कुछ लोग कह रहे हैं कि मुझे भी सदस्य बन जाना चाहिए। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि (लेकिन) मुझे लगता है कि मैं इसके योग्य नहीं हूं- मैं न तो बेरोजगार हूं और न ही आलसी। इसलिए दुख की बात है कि मैं सदस्य नहीं हूं। लेकिन मैं खुद को मानद तिलचट्टा मानता हूं।
सवाल ये नहीं है कि सोनम कॉकरोच हैं या नहीं, सवाल ये है कि ये वक्त देश की राजनीति के विरुद्ध कॉकरोची करने का है या नहीं? सोनम ने जिस तरह से केन्द्र के सामने हथियार डाले हैं उसे देखकर लगता है कि वे अब सत्य और सत्याग्रह से विमुख हो गए हैं। क्योंकि यही वह समय है जब देश में लोकतंत्र बचाने के लिए सड़कों का सन्नाटा तोड़ना जरूरी है। कॉकरोच जनता पार्टी ये सब करने के मूड में। कॉकरोचियों का मकसद सिर्फ हंगामा खड़ा करना है, देश की सूरत बदलना नहीं।
सोनम वांग्चुक भी बहती गंगा में हाथ धोते दिखाई दे रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन करना यही संकेत दे रहा है। कॉकरोची कर सोनम ज्यादा दिनों तक लद्दाख की जनता को धोखा नहीं दे सकते। वे यदि डरकर सत्याग्रह का रास्ता छोड़ यदि कॉकरोचों के पीछे खड़े होते हैं तो उनके अपने आंदोलन की धार तो जाएगी ही, बल्कि बहुत जलद अपनी पहचा भी खो देंगे। वे मानद कॉकरोच हैं या नहीं ये कहकर बच नहीं सकते।


