भिण्ड, 20 मई। कविता का हेतु केवल मनोरंजन मात्र ही नहीं होता, बल्कि सार्वजनिक जीवन को सरल बनाने का सलीका सिखाना भी है। व्यावहारिक रूप से कविता एक कुशल शिक्षक के रूप में उपस्थित होकर स्वभावगत चेतना को जागृत करती है। कवि सम्मेलन गांव-गांव में पहुंचे उजास का यही लक्ष्य है। यह बात मप्र लेखक संघ भिण्ड इकाई द्वारा आयोजित उजास कवि सम्मेलन में संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. सुनील त्रिपाठी निराला ने कही। यह कवि सम्मेलन मंगलवार को सिद्धबाबा धाम पिपरौआ अमायन भिण्ड में आयोजित किया गया। इसकी अध्यक्षता शिक्षक महादेव सिंह मानगढ़ ने तथा संयोजन अमित त्रिपाठी अमित ने किया।
कविता पाठ के क्रम में सतेन्द्र सिंह बबेड़ी भिण्ड ने मां की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘वो बर्तन मांजकर भी चार बच्चे पाल लेती है, मगर उन चार से भी एक मा पाली नहीं जाती।Ó संयोजक जितेन्द्र त्रिपाठी अमित लहार ने कहा कि जीवित को पूजें नहीं, हैं ये कैसे लोग। हार टंगा तस्वीर पर, लगते छप्पन भोग।। राघव कन्हौआ भिण्ड, अंजली चौरसिया निवाड़ी की कविता पाठ के बाद राजीव सक्सेना राज ग्वालियर ने कहा कि वो मुर्दो में जान डाल रहे हैं। फूलों का कलेजा निकाल रहे हैं।। कुछ हवस के पुजारी हैं, गोद भरने के लिए गोदी में बिठाल रहे हैं।। कार्यक्रम के अंत में गुड्डू सर अमायन, सुरेन्द्र सिंह मेहरा, जयसिंह मदनपुरा, शिशुपाल सिंह गुरुजी ने सभी कवियों का सम्मान किया।
Friday, July 31
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