– राकेश अचल
दलदल में फंसी भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहर निकालने के लिए केन्द्र सरकार ने आखिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 3 रुपए की वृद्धि कर दी है। ये निर्णय आज सुबह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इधर मोदी जी पांच देशों की यात्रा पर रवाना हुए उधर ये कठोर फैसला लागू हो गया है।
भारत में पेट्रोल-डीजल की खपत इतनी बड़ी है कि 2-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों और सरकार दोनों की कमाई में भारी फर्क पड़ता है। ताजा सरकारी और उद्योग आंकड़ों के अनुसार भारत में कुल पेट्रोलियम खपत लगभग 20-21 मिलियन टन प्रति माह चल रही है। इसमें डीजल सबसे बड़ा हिस्सा है। हम भारतीय करीब 11-12 करोड़ लीटर पेट्रोल और करीब 28-30 करोड़ लीटर प्रतिदिन खर्च करते हैं। यानी दोनों मिलाकर लगभग 40 करोड़ लीटर रोज। अब यदि कीमत 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ती है, तो मोटा हिसाब 40 करोड़ लीटर की खपत पर लगभग 120 करोड़ अतिरिक्त वसूली प्रतिदिन होगी। जो एक महीने में यह करीब 3,500 करोड़ से ज्यादा होगी। ये जोर का झटका धीरे से दिया गया है। अब आप छाती पीटिए चाहे इस मूल्यवृद्धि को अपने राष्ट्र प्रेम का तमगा, ये आपके ऊपर है। पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ने से पूरा पैसा कंपनियों का मुनाफा नहीं होता। इसमें शामिल होते हैं, कच्चे तेल की महंगी खरीद, रिफाइनिंग लागत, ट्रांसपोर्ट, केन्द्र और राज्य टैक्स और डीलर कमीशन।
दिलचस्प बात यह है कि हाल तक कई रिपोर्टों में सरकारी तेल कंपनियां घाटे की शिकायत कर रही थीं। एक रिपोर्ट के अनुसार तेल उत्पादक कंपनियां पेट्रोल पर 18 रुपए और डीजल पर 35 रुपए प्रति लीटर तक अंडर-रिकवरी बता रही थीं। आपको बता दूं कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है। 2024-25 में भारत की कुल तेल खपत लगभग 56 लाख बैरल प्रतिदिन रही। पेट्रोल की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।
मुझे याद आता है कि इससे पहले सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए की कटौती की थी। पेट्रोल पर ड्यूटी 13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपए, जबकि डीजल पर 10 से शून्य कर दी गई थी। केन्द्र सरकार की ओर से एक लीटर पेट्रोल पर कुल 21.90 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी। स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्टूटी घटने के बाद यह 11.90 रुपए रह गई थी। इसी तरह, एक लीटर डीजल पर कुल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी 17.8 रुपए से घटकर 7.8 रुपए पर आ गई थी। सरकार का ये फैसला पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए था। इस निर्णय की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना में पहली बार पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक उपयोग का सुझाव दिया था। मोदीजी ने कहा था कि आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए। हमें आयातित पेट्रो उत्पादों का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए। इससे न केवल विदेशी मुद्रा बचेगी, बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव भी कम होंगे।


