भिण्ड, 03 मई। खेतों में गेहूं की नरवाई व अन्य फसल अवशेष जलाने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसके बावजूद आलमपुर सहित आस-पास के गांवों में गेहूं की नरवाई में आए दिन आग लगने की घटना सामने आ रही है।
आलमपुर क्षेत्र में अभी अनेक किसानों ने अपने खेतों में खड़ी गेहूं की नरवाई से भूसा भी नहीं बनवाया है। लेकिन इससे पहले ही उनके खेतों में खड़ी नरवाई आग की चपेट में आकर जलने की घटनाएं सामने आ रही हैं। जिससे अनेक किसानों के समक्ष भूसा बनवाने का संकट उत्पन्न हो गया है। लोग बताते हैं कि जिन लोगों ने गेहूं की नरवाई से भूसा बनवा लिया है, वह लोग अपने खेतों में आग लगा देते हैं, हवा चलने पर यही आग अन्य किसानों के खेतों में पहुंच जाती है। जिससे उनके खेतों में खड़ी गेहूं की नरबाई आग से जलकर राख हो जाती है। जबकि जिला प्रशासन का स्पष्ट रूप से कहना है कि फसल अवशेष जलाना न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह धरती और पर्यावरण के लिए धीमा जहर है। आग से भूमि के मित्र सूक्ष्म जीव और जैविक कार्बन नष्ट हो जाते हैं, जिससे उपजाऊ जमीन बंजर होने लगती है। इससे उत्पन्न होने वाला धुआं वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ाता है, जो जनस्वास्थ्य के लिए घातक है। फसल अवशेषों को जलाने के बजाय नरवाई प्रबंधन के आधुनिक व वैकल्पिक तरीके अपनाएं।
Saturday, May 30
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