-एसडीएम भिण्ड ने नरवाई जलाने वालों के खिलाफ की सख्त कार्रवाई
भिण्ड, 03 मई। खेतों में ही नरवाई व अन्य फसल अवशेष जलाने वालों के खिलाफ जिले में लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इस कड़ी में कलेक्टर भिण्ड के कड़े निर्देशों के अनुपालन में तहसील भिण्ड ग्रामीण में कानून का उल्लंघन कर खेतों में आग लगाने वाले 26 व्यक्तियों पर लगभग 27 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह बड़ी कार्रवाई अनुविभागीय अधिकारी राजस्व भिण्ड अखिलेश शर्मा द्वारा तहसीलदार भिण्ड ग्रामीण के प्रतिवेदन रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
28 अप्रैल 2025 को नरवाई जलाने वाले जिन लोगों के खिलाफ अर्थदण्ड की कार्रवाई की गई है, उनमें अजय सिंह, विजय सिंह, नरेन्द्र सिंह पुत्रगण अर्जुन सिंह जाति अहीर निवासी ग्राम अकोड़ा पर 2500 रुपए, मालती पुत्र कोकसिंह निवासी ऊमरी, सत्येन्द्र सिंह कुशवाह पुत्र जगमोहन सिंह कुशवाह निवासी हाउसिंग कॉलोनी भिण्ड पर 2500 रुपए, स्मिता देवी पत्नी मुन्नासिंह जाति यादव निवासी पुरानी बस्ती पर 2500 रुपए, वीरेन्द्र सिंह पुत्र कोकसिंह जाति यादव निवासी ग्राम ऊमरी पर 2500 रुपए, मायाराम, कमल किशोर पुत्रगण दिल्लीराम, जलदेवी बेवा रामहेत, संजीव पुत्र रामहेत जाति बरेठा निवासी ऊमरी, छोटेलाल पुत्र भूरेलाल, अम्बरेश कुमार पुत्र बद्रीप्रसाद, नकुल पुत्र शादीलाल, अम्बरेश कुमार पुत्र बद्रीप्रसाद पर 5000 रुपए, राजेन्द्र सिंह, मालू सिंह पुत्रगण शिव सिंह निवासी ग्राम ऊमरी पर 2500 रुपए, रश्मि पत्नी सर्वेन्द्र सिंह निवासी ऊमरी, अमर सिंह, लखपति पुत्रगण सुघर सिंह, जितेन्द्र सिह पुत्र लखपति निवासी ग्राम ऊमरी पर 2500 रुपए, रणवीर सिंह पुत्र देवीदयाल जाति यादव निवासी ग्राम अकोड़ा पर 2500 रुपए, श्यामबाबू पुत्र गोपीनाथ, बलवीर सिंह पुत्र दुर्जन सिंह, रामकुमार पुत्र रामजानकी, राजदुलारी उर्फ नंदता पत्नी दिनेशचन्द्र, कमल सिंह पुत्र जण्डेल सिंह, सुनील सिंह पुत्र जण्डेल सिंह, प्रदीप सिंह पुत्र जण्डेल सिंह, राघवेन्द्र सिंह पुत्र गोपीनाथ, अवधेश पुत्र गोपीनाथ, राजकुमार पुत्र गोपीनाथ, विद्यादेवी पत्नी रामप्रवेश निवासीगण अकोड़ा पर 5 हजार रुपए का पर्यावरण जुर्माना राशि अधिरोपित किया गया है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फसल अवशेष जलाना न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह धरती और पर्यावरण के लिए धीमा जहर है। आग से भूमि के मित्र सूक्ष्म जीव और जैविक कार्बन नष्ट हो जाते हैं, जिससे उपजाऊ जमीन बंजर होने लगती है। इससे उत्पन्न होने वाला धुआं वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ाता है, जो जनस्वास्थ्य के लिए घातक है। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय नरवाई प्रबंधन के आधुनिक व वैकल्पिक तरीके अपनाएं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि पर्यावरण और मृदा स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।


