– प्रथम पत्रकार देवर्षि नारद जयंती पर कार्यक्रम आयोजित
भिण्ड, 03 मई। ब्रह्माण्ड के प्रथम पत्रकार देवर्षि नारद जयंती के अवसर पर शहर के उत्कृष्ट विद्यालय क्र.एक में कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. रामकिशोर उपाध्याय ने कहा कि आज के दौर में पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली सशक्त शक्ति बन चुकी है। पत्रकारिता के माध्यम से समाज की आवाज़ शासन-प्रशासन तक पहुंचती है और आम जनमानस की समस्याएं उजागर होती हैं। यही कारण है कि पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी कहा जाता है। पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्य, निष्पक्षता और जनहित की भावना से कार्य करना है। सूचना के विस्फोट के इस दौर में पत्रकारिता पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली और प्रभावशाली माध्यम बन चुकी है। स्मार्टफोन की स्क्रीन पर उभरती खबर कुछ ही पलों में जनमत तैयार कर देती है, सरकारों पर दबाव बना देती है और समाज की दिशा तक तय कर देती है। लेकिन इस तेज, तात्कालिक और प्रतिस्पर्धा पत्रकारिता के बीच एक मूल प्रश्न बार-बार उभरता है, क्या हम अपने मूल उद्देश्य से भटक रहे हैं? यदि भारतीय परंपरा के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो संचार और संवाद की अवधारणा कोई नई नहीं है। हमारे पुराणों में देवऋषि नारद जी का चरित्र इस बात का प्रमाण है कि सूचना का आदान-प्रदान केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक उत्तरदायित्व था। नारदजी केवल संदेशवाहक नहीं थे, वे संवाद के वाहक थे। उनका हर हस्तक्षेप किसी न किसी रूप में लोक कल्याण से जुड़ा होता था। वे तीनों लोकों, देव, दानव और मनुष्य के बीच संतुलन स्थापित करने वाले एक सजग संप्रेषक थे। पौराणिक मान्यताओं और भारतीय परंपरा के अनुसार, देवर्षि नारद को ब्रह्माण्ड का प्रथम पत्रकार माना जाता है।
मुख्य अतिथि जिला जनसंपर्क अधिकारी पुष्पराज सिंह ने कहा कि आधुनिक सोशल मीडिया के दौर में हर व्यक्ति संभावित सूत्र बन चुका है,लेकिन हर सूचना विश्वसनीय नहीं होती। ऐसे में पत्रकार की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है वह केवल खबर देने वाला नहीं, बल्कि सत्य का संरक्षक है। उन्होंने कहा कि पत्रकार एक योद्धा होता है। वह देश और समाज के विकास कार्य में अपने जीवन को गलाता है। आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जी पौराणिक काल में एक आदर्श पत्रकार की भूमिका निभाते हुये संदेश का संप्रेषण करते थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शा. सांदीपनि विद्यालय भिण्ड के प्राचार्य पीएस चौहान ने कहा कि देवऋषि नारदजी का आदर्श एक प्रासंगिक संदर्भ प्रस्तुत करता है। नारद जी संवाद करते थे, केवल सूचना नहीं देते थे। देवऋषि नारद जी का चरित्र हमें यही सिखाता है कि सूचना का अर्थ केवल खबर देना नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देना है। पत्रकारिता तब ही सार्थक है जब वह सत्ता से सवाल पूछे,समाज की पीड़ा को स्वर दे और बिना किसी भय या पक्षपात के सत्य को सामने लाए। कार्यक्रम मे उपस्थित पत्रकारों का शॉल एवं तिलक लगाकर सम्मान किया गया कार्यक्रम में केशव स्मृति सेवा न्यास के पदाधिकारी और आयोजन समिति के सदस्य एवं पत्रकार बंधु उपस्थित रहे।


