– राकेश अचल
आज भारत की समस्या दलबदल, खरीद-फरोख्त नहीं है, असल समस्या अवसरवादी दलबदल की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान देश के जन आंदोलनों का हो रहा है। भाजपा योजनाबद्ध तरीके से जन आंदोलनों की विश्वसनीयता समाप्त कर रही है।
आप जानते हों या न जानते हों, लेकिन हकीकत ये है कि किसी देश को बर्बाद करने के लिए पहले वहां के लोगों की आंदोलनों में विश्वास को खत्म किया जाता है। पहले आंदोलन फिर वहां की मीडिया को कब्जे में लेकर उसके विवेक को नष्ट किया जाता है। इन दो कदमों के बाद गोदी मीडिया और फर्जी कथावाचक मिलकर सत्ता के इशारे पर लोगों को पाखण्ड चमत्कार में डुबो कर जनता के सोचने की क्षमता यानि विवेक को खत्म कर देते हैं, सत्ता का आखिरी पैंतरा लोगों को फ्रीबिज के जरिए परजीवी बनाने का होता है। लाडली बहिना और 5 किलो राशन तो इस मामले में रामबाण साबित हुआ है। इसके सहारे भाजपा अपवादों को छोड़कर प्राय: सभी जगह जीती है।
आज जन आंदोलन कुंद हो गए हैं। जनता धर्मांध होकर प्रतिकार की क्षमता खो बैठी है। अब किसी को किसी भी सरकारी फैसले से फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि हम सब कब गुलाम बन गए हैं, हमें इसका पता ही नहीं चलता। किसी की गालियों और वैश्विक अपमान से हमें लज्जा तक नहीं आती। बात राघव चड्ढा एंड कंपनी की है। जनांदोलन से राजनीति में आए राघव चड्ढा में यदि रत्तीभर विवेक होता तो वे आप पार्टी छोड़कर ऐसी भाजपा में कभी शामिल नहीं होते जिसे वे ताउम्र गरियाते रहे। यदि वे जनांदोलन का मतलब समझते तो किसी विपक्षी दल में शामिल होते या फिर एक और आम आदमी पार्टी बना लेते। आम आदमी पार्टी ने एक दशक में कोई तब्दीली नहीं की। आम आदमी पार्टी को अरविन्द केजरीवाल ने उसी तरह जेबी संगठन बना दिया जैसा बसपा, सपा या दूसरे क्षेत्रीय दल हैं।
आम आदमी पार्टी से जाने वाले राघव चड्ढा पहले नेता नहीं है। उनसे पहले आम आदमी पार्टी से तमाम उत्साही लाल जा चुके हैं। आशुतोष और कुमार विश्वास, खुद अन्ना हजारे भी आम आदमी पार्टी के साथ नहीं हैं। मैं अरविन्द केजरीवाल को सहृदयता पूर्वक कहना चाहता हूं कि वे या तो आम आदमी पार्टी को अपनी जेब से बाहर कर दें या फिर पार्टी भंग कर दें। अरविन्द ने देश की जनता से धोखाधड़ी की है। इसलिए राघव चड्ढा ने अरविन्द से धोखाधड़ी की है। कायदे से ये दलबदल अनैतिक और अवसरवादी है। इसे राज्यसभा के लिए सीढ़ी बनाने की जरूरत नहीं है। आम आदमी पार्टी में डाका नहीं पड़ा, नकबजनी हुई है, सात ईंटें निकालकर किले में प्रवेश द्वार बनाया गया है।
भाजपा राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को निबटाने के लिए पिछले 46 साल से काम करती आई है। भाजपा ने हर प्रतिद्वंदी के यहां डाका डाला, नकब लगाई और जो माल मशरूका मिला उसे समेट लिया। नफा नुक्सान नहीं देखा। सत्ता के लिए भाजपा हर अपराध कर सकती है, कर रही है। भाजपा के सुप्त अभिकर्ता हर राजनीतक दल मे मौजूद हैं, जो समय समय पर अपना खेल दिखा देते हैं। आम आदमी पार्टी धीरे-धीरे तिरोहित हो रही है। बेहतर है कि पार्टी सुप्रीमो अरविन्द केजरीवाल देश के जनांदोलन से किए गए छल के लिए देश से क्षमा याचना करें और खुद ही पार्टी को समाप्त करने का ऐलान करें, ताकि जिसे जहां जाना हो, चला जाए।


