– राकेश अचल
‘सूत न कपास और जुलाहों में लठ्ठम-लठ्ठ’ अब एक कहावत नहीं रही, भाजपा ने इसे हकीकत में बदल दिया है। मन्दिर-मस्जिद और हिंदू-मुसलमान का खेल खेलते-खेलते सत्ता में बने रहने के लिए भाजपा के दूरदर्शी नेतृत्व ने अब महिला आरक्षण को नया चुनावी मुद्दा बना लिया है, जबकि हकीकत ये है कि भाजपा खुद अभी तक चुनावों में महिलाओ को 10-12 प्रतिशत से ज्यादा टिकट नहीं देती।
लोकसभा में 131 वां संविधान संशोधन विधेयक जान-बूझकर गिरवाने वाली भाजपा ने बड़ी ही चालाकी से कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष को दुशासन और निरीह महालाओं को द्रोपदी बनाकर खुद कृष्ण बनने की मुहिम छेड़ दी है। पूरे 9 साल महिला आरक्षण विधेयक पर कुण्डली मारकर बैठी रही भाजपा सरकार ने आम चुनाव से ठीक ढाई साल पहले महिला आरक्षण का मुद्दा गर्म किया और इसे लागू करने का नाटक कर नाकामी का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ दिया। राजनीति में साम, दाम, दण्ड, भेद सब चलता है। कांग्रेस किसी जमाने में सत्ता से चिपके रहने में माहिर थी, लेकिन अब ये गुर या गुरूमंत्र भाजपा के हाथ लग गया है। विपक्ष को खलनायक बनाने की दूरगामी रणनीति लागू करने में भाजपा विपक्ष से चार कदम आगे चल रही है। कांग्रेस और दूसरे गैर भाजपा दल संविधान बचाते रह गए और भाजपा ने जो खेल करना था सो कर लिया।
आपको याद है कि महिलाओं के वोट के सहारे सत्ता में आने और बने रहने का तरीका मप्र ने भाजपा को दिया था। लाडली लक्ष्मी और लाडली बहना योजना के जरिए मात्र 1250 रुपए प्रति महिना की राजसहायता देकर महिलाओं के वोट कबाड़ने का प्रयोग अब भाजपा हर राज्य विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल कर सफलता की तमाम सीढ़ियां चढ़ चुकी है। भाजपा ने 2024 के आम चुनाव में 400 पार न कर पाने के बाद सबक सीखा है कि महिला मतदाता ही वो गाय है जिसका पल्लू पकड़कर चुनावी वैतरणी पार की जा सकती है। कांग्रेस इस षड़यंत्र को समझ ही नहीं सकी और देखते ही देखते पूरे देश में खलनायक बन गई।
भाजपा ने 2023 में पारित हो चुके महिला आरक्षण कानून पर एक रत्ती काम नही किया लेकिन बंगाल, तमिलनाडु और केरल जीतने के लिए भाजपा 131 वां संविधान संशोधन विधेयक लेकर संसद में उपस्थित हो गई। दक्षिण-पूर्व के बड़े राज्यों में मतदान से ठीक एक हफ्ते पहले इस संविधान संशोधन विधेयक को लाने का मतलब ही चुनाव जीतना था। अब भाजपा इस ब्रह्मास्त्र से बंगाल या तमिलनाडु जी पाएगी या नहीं? मैं नहीं जानता लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि भाजपा ने संविधान संशोधन विधेयक को एक पांसे के रूप में इस्तेमाल किया और महिलाओ की सहानुभूति बटोरने में कामयाब रही।
देश की आधी आबादी आज की तारीख में अपना हित-अनहित पहचानने में समर्थ नहीं हो सकी, अन्यथा सबसे पसले भाजपा से पूछती कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तो भाजपा ने क्यों महिला आरक्षण का विरोध किया? दरअसल महिला मतदाता अपना कीमती वोट कुछ रुपयों के लालच में भाजपा को पहले ही बेच चुकी हैं और अब एक बार फिर भाजपा के जाल में फंस गई है। सच मानिए मुझे कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष के ऊपर दया आती है, क्योंकि भाजपा ने महिला आरक्षण कानून को परिसीमन से जोड़कर उसके सामने रखी जीत की थाली छीन ली है और विपक्ष को भनक तक नहीं लगी। प्रधानमंत्री ने इसी मुद्दे पर राष्ट्र के नाम संदेश के बहाने जो ट्यून सेट की थी आज उसी को ब्लॉक स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अभियान के रूप में बजाया जा रहा है।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस और समूचा विपक्ष हतप्रभ है। संसद में सरकार को धूल चटाने वाला विपक्ष अभी जीत का स्वाद भी नहीं ले पाया था कि सरकार ने उसे कसैला बना दिया। जिस आक्रामकता के साथ भाजप संसद में अपनी हार को जीत में बदलने के लिए मैदान में उतरी है उसे देखकर विपक्ष के होश फाख्ता हो गए हैं। विपक्ष जब तक सम्हलेगा तब तक भाजपा काफी आगे निकल जाएगी। मैं भाजपा को उसके शैशवकाल से देख रहा हूं। मैं जानता हूं कि तिल को ताड़ बनाने में भाजपा की कोई सानी नहीं। भाजपा मुद्दों के आधार पर राजनीति नहीं करती। भाजपा की राजनीति का आधार ही तिलिस्म है। जादूगर भले ही संसदीय नियमावली में असंसदीय शब्द हो, लेकिन संसद के बाहर उसे लोक मान्यता हासिल है। लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी प्रधानमंत्री को जादूगर कह चुके हैं। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने आम सभाओं में अपने आपको जादूगर कहा था और पूरा देश अब इसी जादू के नरेन्द्र जाल का मजा ले रहा है, क्योंकि अब इन्द्र जाल तो किसी को आता नहीं।


