– प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में गूगल मीट पर हुआ कार्यक्रम
भिण्ड, 20 अप्रैल। विश्व जल दिवस और विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर सोमवार को प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शा. एमजेएस महाविद्यालय भिण्ड में मप्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद भोपाल के सौजन्य से ऑनलाइन गूगल मीट के माध्यम से कार्यशाला आयोजित की गई।
इस अवसर पर सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. निरजन श्रोतिय ने विद्यार्थियों को जल संरक्षण और लैंगिक समानता विषय पर व्याख्यान के माध्यम से बताया कि वैश्विक जल और स्वच्छता संकट हर किसी को प्रभावित करता है, लेकिन समान रूप से नहीं। जहां लोगों को सुरक्षित रूप से प्रबंधित जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है, वहां महिलाएं और लड़कियां दुर्व्यवहार, हमले और खराब स्वास्थ्य के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं, जिससे उनकी पढ़ाई, काम करने और समाज में पूरी तरह से भाग लेने की क्षमता प्रभावित होती है। घर, स्कूल, कार्य स्थल और सार्वजनिक स्थानों पर जल निकासी और स्वच्छता में सुधार लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है।
इस अवसर पर निम्न बिंदु वार चर्चा की गई। जिसमें आम तौर पर पानी लाने की जिम्मेदारी महिलाओं और लड़कियों पर होती है। यह एक खतरनाक, समय लेने वाला और शारीरिक रूप से थकाने वाला काम हो सकता है। दिन में कई बार पैदल लंबी यात्रा करने से महिलाएं और लड़कियां हमलों की चपेट में आ सकती हैं और अक्सर स्कूल जाने या आमदनी करने से वंचित रह जाती हैं। महिलाओं और लड़कियों के लिए स्वच्छता व्यक्तिगत सुरक्षा का मामला है। बाहर शौचालय जाना या पुरुषों और लड़कों के साथ सुविधाएं साझा करना महिलाओं और लड़कियों को दुर्व्यवहार और हमले के बढ़ते जोखिम में डालता है।
महिलाओं और लड़कियों की स्वच्छता संबंधी विशेष आवश्यकताएं होती हैं। उनके लिए मासिक धर्म स्वच्छता और गर्भावस्था के प्रबंधन हेतु स्वच्छ, सुविधाजनक, ताला लगाने योग्य और लिंग-विभाजित स्थान की आवश्यकता है, जहां स्वच्छता उत्पादों और निपटान प्रणालियों की सुविधा उपलब्ध हो। सुरक्षित जल और स्वच्छता का अभाव एक असमानता का मुद्दा है। खराब जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं से महिलाएं और लड़कियां असमान रूप से प्रभावित होती हैं। हालांकि सुधारों की योजना और कार्यान्वयन में अक्सर उनकी आवाज और जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे उनका निरंतर हाशिए पर रहना सुनिश्चित होता है। महिलाओं और लड़कियों को सहायता प्रदान करने में विफल रहने से हम 2030 के एजेंडा को खतरे में डाल रहे हैं। पानी और स्वच्छता तक पहुंच मानवाधिकार हैं। जहां महिलाएं इन अधिकारों का आनंद नहीं ले पातीं, वहां उनका स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होता है, जिससे उनकी शैक्षिक और आर्थिक अवसर सीमित हो जाते हैं और समाज में उनकी पूर्ण भूमिका से वंचित होना पड़ता है। इस अवसर पर महाविद्यालय के अधिकांश विद्यार्थी ने भाग लिया और जल संरक्षण और लैंगिक समानता पर आधारित ज्ञान प्राप्त किया।


