– राकेश अचल
दुनिया खाड़ी की जंग से जूझ रही है, लेकिन भारत की सरकार पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में उलझी है। देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पश्चिम बंगाल में बाबाओं की तरह डेरा डालकर बैठे हैं। भारत के नेताओं के लिए देश से ज्यादा चुनाव महत्वपूर्ण हैं।
भारत सरकार के लिए बंगाल के चुनाव नाक का सवाल बने हुए हैं। बंगाल में चुनाव में सत्तारूढ़ टीएमसी और मुख्य विपक्षी दल बीजेपी के बीच सीधी टक्कर है। नंदीग्राम से चुनाव लड़ रहे भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के नामांकन में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद पहुंचे। आगामी 15 दिनों तक शाह लगातार पश्चिम बंगाल में ही रहकर चुनावी कमान संभालेंगे।
आपको याद होगा कि पिछली बार ममता बनर्जी नंदीग्राम में हार गई थीं। शाह का दावा है कि इस बार वह भवानीपुर के साथ-साथ पूरे बंगाल को खो देंगी। उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी का नामांकन बंगाल में टीएमसी के पतन की शुरुआत है। शाह ने जोर देकर कहा कि नंदीग्राम की जनता इस बार फिर से इतिहास दोहराएगी और ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी। भजपा बंगाल जीतने के लिए भाजपा पिछले एक दशक से हाथ पांव मार रही है। लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिल रही। इस बार अमित शाह ने पूरे बंगाल का दौरा किया है, उन्हें हर जगह एक ही आवाज सुनाई दे रही है कि ममता बनर्जी को बाय-बाय कर दो।
गृह मंत्री को लगता है कि बंगाल की जनता टीएमसी की टोलबाजी और गुण्डागर्दी से पूरी तरह त्रस्त है। आए दिन हो रहे बम धमाकों और बेरोजगारी से युवा परेशान हैं। राज्य में आए दिन होने वाले बम धमाकों ने सुरक्षा व्यवस्था को तार-तार कर दिया है। बंगाल में डेरा डाले बैठे केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह का आरोप है कि टीएमसी सरकार ने घुसपैठियों को संरक्षण दिया है, जिससे राज्य की डेमोग्राफी बदल रही है। भाजपा और भाजपा की सरकार तमिलनाडु में, केरल में पहले से हार माने बैठी है, इसलिए उसका सारा जोर बंगाल पर है। असम और पुंडुचेरी में भाजपा पहले से सत्ता में है और उसे लगता है कि इन दो राज्यों में किसी दल से कोई चुनौती नहीं है। भाजपा सोचती है कि यदि एक बार बंगाल उसकी मुट्ठी में आ जाए तो उसकी ताकत दो गुना बढ़ सकती है।
दूसरी तरफ बंगाल में ममता बनर्जी अकेले दम पर चुनाव लड़ रही हैं। भाजपा रोको अभियान चलाने वाली कांग्रेस और दूसरे दल ममता के साथ नहीं हैं। भाजपा ममता की इसी कमजोरी का फायदा उठाना चाहती है। यहां चुनाव एनडीए बनाम यूपीए नहीं, बल्कि भाजपा बनाम ममता है। ममता बनर्जी देश में भाजपा के लिए कांग्रेस से बड़ी चुनौती हैं और यदि भाजपा ममता को सत्ताच्युत न कर पाई तो वे 2029 में आम चुनाव के वक्त भाजपा के लिए मुख्य चुनौती बन सकती हैंं। याद रखिये कि भाजपा ने राहुल गांधी को तो पप्पू बना दिया था, लेकिन ममता आज भी दीदी ही बनी हुई हैं। खुद प्रधानमंत्री ममता को दीदी ओ दीदी! कह चुके हैं।


