भिण्ड, 23 मार्च। नवरात्रि महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रसिद्ध तीर्थस्थल रावतपुरा सरकार धाम पर चल रही भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को कथा व्यास पं. अंकित पचौरी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनकी लीलाओं का मनमेहक वर्णन किया। भागवत कथा के दौरान भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही पूरा पंडाल झूम उठा और भगवान के जन्म पर कथा पंडाल में बैठे श्रद्धालु हाथी-घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की भजनों पर जमकर झूमे।
कथा व्यास अंकित पचौरी ने बताया कि सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस आठवीं संतान की मृत्यु का भी भय सता रहा था क्योंकि उसका भाई कंस अपने काल को टालने के लिए देवकी की सात संतानों को पहले ही मार चुका था। लेकिन भगवान की लीला तो वे स्वयं ही समझ सकते हैं और जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ जेल के सभी बंधन स्वत: ही टूट गए और जन्म भगवान श्रीकृष्ण सीधे गोकुल पहुंच गए। जहां कुछ समय बाद अपने बाल रूप में भगवान श्रीकृष्ण गोकुल में नित्य ही माखन चोरी की लीला करते हैं, वहीं माखन चोरी करने की लगातार शिकायतें आने केे बाद जब मां यशोदा के बार-बार समझाने पर भी श्रीकृष्ण नहीं मानते हैं और जब मां यशोदा ने श्रीकृष्ण को रस्सी से बांधना चाहा तो नहीं बांध सकीं, क्योंकि भगवान को कौन बांध सकता है। लेकिन भगवान अपनी मां की दयनीय दशा को देखते हुए स्वयं रस्सी से बंध जाते हैं।
कथा व्यास पचौरी ने कहा कि यह बात सत्य है कि भगवान को न धन से न पद से न प्रतिष्ठा से किसी से नहीं बांधा जा सकता है, भगवान तो प्रेम के बंधन में स्वयं ही बंध जाते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि अपने कर्म को सुधार ले तो उसका जीवन सफल हो जाता हैं। कर्म ही मनुष्य को अच्छा या बुरा बनाते हैं। इसलिए मनुष्य जीवन में अच्छे कर्म कर परमात्मा की भक्ति से मोक्ष को प्राप्त होता है। इस दौरान रावतपुरा धाम के महंत रविशंकर महाराज समेत सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
Tuesday, September 29
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