– श्रीमद् भागवत कथा का दूसरा दिन
भिण्ड, 05 मार्च। आलमपुर नगर के छत्री बाग हनुमान मन्दिर पर चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा के दूसरे दिन गुरुवार को उत्तर प्रदेश के जालौन से पधारे कथा वाचक जितेन्द्र उपाध्याय (जीतू महाराज) ने राजा परीक्षित संवाद, शुकदेव जन्म सहित अन्य प्रसंग सुनाया।
कथा वाचक ने शुकदेव परीक्षित संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि एक बार परीक्षित महाराज वन में चले गए। उनको प्यास लगी तो समीक ऋषि से पानी मांगा। ऋषि समाधि में थे, इसलिए पानी नहीं पिला सके। परीक्षित ने सोचा कि साधु ने अपमान किया है। उन्होंने मरा हुआ सांप उठाया और समीक ऋषि के गले में डाल दिया। यह सूचना पास में खेल रहे बच्चों ने समीक ऋषि के पुत्र को दी। ऋषि के पुत्र ने श्राफ दिया कि आज से सातवें दिन तक्षक नामक सर्प आयेगा और राजा को जलाकर भस्म कर देगा। समीक ऋषि को जब यह पता चला तो उन्होंने दिव्य दृष्टि से देखा कि यह तो महान धर्मात्मा राजा परीक्षित हैं और यह अपराध इन्होंने कलियुग के वशीभूत होकर किया है। समीक ऋषि ने जब यह सूचना जाकर परीक्षित महाराज को दी तो वह अपना राज्य अपने पुत्र जन्मेजय को सौंपकर गंगा नदी के तट पर पहुंचे। वहां बड़े ऋषि, मुनि देवता आ पहुंचे और अंत में व्यास नंदन शुकदेव वहां पहुंच। शुकदेव को देखकर सभी ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। कथा सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा के दौरान धार्मिक गीतों पर श्रद्धालु जम कर झूमें। कथा में दूसरे दिन बड़ी संख्या में महिला-पुरूष कथा सुनने पहुंचे। इस कथा का आयोजन ब्रजपुरिया परिवार द्वारा किया गया। परीक्षित रामरती देवी-गोटीराम राठौर है।


