भिण्ड, 03 मार्च। घर-घर गीता का प्रचार हो जन अभियान के अंतर्गत बायपास रोड स्थित अर्जेटेश्वर महादेव मन्दिर परिसर में गीता स्वाध्याय किया गया। कार्यक्रमों की शुरुआत मन्दिर के महंत व यजमान 108 रामदास महाराज ने भगवान कृष्ण के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण कर की।
विश्व गीता प्रतिष्ठानम के मीडिया प्रभारी शैलेश सक्सेना ने बताया कि घर-घर गीता का प्रचार अभियान जगत एक वर्ष से भी अधिक समय से नियमित रूप से चल रहा है। स्वाध्याय पत्र का वचन जिला संयोजक विष्णु कुमार शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति घर पर प्रतिदिन गीता का पाठ करें लोभ, मोह, ईर्ष्या एवं क्रोध को प्यार आने वाला व्यक्ति ही परमात्मा को प्रिय होता है। अत: हमें सत्कर्म के मार्ग पर चलना चाहिए, निस्वार्थ भाव से सभी का कल्याण चाहने वाला व्यक्ति ईश्वर का अंश होता है। सुभाषित की माध्यम से प्रमोद मिश्रा ने गीता प्रेमियों से लोभ, लालच का त्याग करने का आह्वान करते हुए भगवत भक्ति करने का आग्रह किया। सेवानिवृत्ति नायब तहसीलदार प्रदीप ऋषिश्वर ने एक प्रेरक प्रसंग के माध्यम से बताया कि हमें श्रद्धापूर्वक साधना में लगे रहना चाहिए, साधना अनवरत प्रगाढ़ होने से सिद्धियां भी आने लगती है, उन्होंने अपने गुरु चन्द्रमोहन महाराज को साधना से प्राप्त के बारे में भी बताया।
अमृत वचन की प्रस्तुति देते हुए आदित्य चौहान ने कहा कि जीवन में हमें सकारात्मक विचारधारा के साथ आगे बढ़ना है, नकारात्मक विचार जीवन में पतन की ओर ले जाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे कि एक पेड़ से लाखों माचिस की तीली बनाए जा सकती है, लेकिन माचिस की एक तीली लाखों पेड़ों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है, इसीलिए सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े और सृष्टि के सृजन में सहयोगी बने। प्रेरक प्रसंग की प्रस्तुति महेन्द्र दीक्षित ने दी, उन्होंने बाबा नीम करौली के प्रसंग के माध्यम से लोगों को स्मरण का भाव रखने के बारे में बताया कि किस प्रकार मनुष्य निरंतर भगवान स्मरण करके परमात्मा की प्राप्ति की ओर अग्रसर हो सकता है।
गीता के आठवें अध्याय के श्लोक की व्याख्या करते हुए ज्ञानेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रयाण काल में यदि भगवान का स्मरण करते हुए शरीर छोड़ा जाता है तो वह जीव परमात्मा को प्राप्त होता है। लेकिन यह स्मरण अंत समय में होना बहुत ही कठिन है, इसके लिए भगवान ने अभ्यास योग का वर्णन किया है। अध्याय के प्रारंभ में अर्जुन ने भगवान से 6 प्रश्न पूछे हैं, भगवान ने उनके उत्तर देते हुए अंत समय में किस तरह प्रयाण हो इसका भी वर्णन किया है, भगवान ने कहा कि अभ्यास योग से युक्त चित्त कहीं और भटकता नहीं है, इसलिए अर्जुन तू मेरा स्मरण कर और युद्ध कर 7 इन सूत्रों को।
अंत में मां गीता की आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर 108 रामदास महाराज, दुर्गादत्त शर्मा, राजीव शर्मा, आनंद त्रिपाठी, अंकित बंसल, कुलदीप राजावत, आदित्य चौहान, महेन्द्र दीक्षित, शैलेश सक्सेना, कुलदीप परिहार, शिशुभान सिंह मास्टर, बांके सिंह, बजरंग सिंह, सुमेर सिंह, शिवसिंह भगत, रामऔतार श्रीवास, पूरन सिंह दीवानजी, हवलदार सिंह, अतर सिंह, लाखन सिंह, विनोद पंडित, राघवेन्द्र तोमर, रामऔतार परिहार, बालक दास महाराज, लालू भदौरिया, विशाल सिंह, रामप्रकाश एवं कई महिलाएं उपस्थित रहीं।
Sunday, April 5
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