भिण्ड, 30 जनवरी। दबोह क्षेत्र के अमाहा में मां रणकोशला देवी मां के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में जन सहयोग से चल रही श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा के सातवे दिन शुक्रवार को कथा व्यास साध्वी सुमन सरगम ने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष प्रसंगों का वर्णन किया।
साध्वी सुमन सरगम ने कहा कि सुदामा भगवान कृष्ण के परम मित्र थे। भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। गरीबी के बाबजूद भी हमेशा भगवान के ध्यान में मग्न रहते थे। पत्नी सुशीला सुदामा से बार बार आग्रह करती है कि आपके मित्र तो द्वारकाधीश हंै, उनसे जाकर मिलो, शायद वह हमारी मदद कर दें। सुदामा पत्नी के कहने पर द्वारका पहुंचते हैं और जब द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का ब्राह्मण आया है। कृष्ण यह सुनकर नंगे पैर दौड़कर आते हैं और अपने मित्र को गले लगा लेते हैं। उनकी दिन दशा दिखकर कृष्ण के आंखों में आशु से अश्रुओं की धारा बहने लगती है। सुदामा को सिंहासन पर बैठाकर भगवान कृष्ण सुदामा के चरण धोते हैं। सभी पटरानियां सुदामा से आशीर्वाद लेती है।
सुदामा विदा लेकर अपने स्थान लौटते हैं। तो भगवान कृष्ण की कृपा से अपने यहां महल बना पाते हैं लेकिन सुदामा जी अपनी फूस की बनी कुटिया में रहकर भगवान का स्मरण करते हैं। उन्होंने कहा कि जब जब भक्तों पर विपदा आई है, प्रभु उसका तारण करने जरूर आते हैं। अगले प्रसंग में शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को सात दिन की श्रीमद् भागवत कथा सुनाई। जिससे उनके मन से मृत्यु का भय निकल गया। तक्षक नाग आता है और राजा परीक्षित को डंस लेता है राजा परीक्षित कथा श्रवण करने के कारण भगवान के परम धाम को पहुंचते हैं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। यहां बता दें कि शनिवार को जगत जननी मां रणकौशला देवी मां का जन्मोत्सव विधि विधान से हवन पूजन अर्चन के साथ मनाया जाएगा। साथ ही श्रीमद् भागवत कथा संपन्न होने पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।


