भिण्ड, 09 जनवरी। इंदौर की भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत हो गई और 100 की करीब लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, करीब दो हजार लोग दूषित जल पीने से पीड़ित हुए हैं। स्वच्छ भारत अभियान में इंदौर करीब 9 बार पहले स्थान पर आता रहा है, लेकिन इस घटना ने स्वच्छ भारत अभियान और हर घर जल योजना की पोल खोल कर रख दी है। इंदौर में हुई मौतों के लिए बीजेपी की सरकार पूर्ण रूप से जिम्मेदार है। यह आरोप जिला कांग्रेस कमेटी शहर के अध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया उर्फ पिंकी ने पत्रकार वार्ता में लगाए।
उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि पाईप लाइन बदलने के ठेके का अप्रूवल 22 जुलाई 2022 को मिल चुका था, लेकिन इस पर काम नहीं हुआ, इससे यह साबित होता है कि यह काम किसी कट कमीशन के चलते रुका हुआ था, इंदौर के अलावा अमित शाह के इलाके गांधीनगर में भी टाइफाइड फैल रहा है, इंदौर में इतनी भयंकर घटना के बाबत जब पत्रकार नगरी प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल पूछ रहे थे तब वह फोकट और घण्टा जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर पत्रकारों की गरिमा का हनन कर रहे थे। मप्र की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक इस घटना पर गंभीर नहीं हैं, इंदौर की घटना पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और हो भी नहीं रही है, लेकिन उक्त घटना पर सवाल पूछना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। दिल्ली में आप सरकार थी तो पानी काला था, बीजेपी की सरकार आ गई तो पानी पीला हो गया। राज्य सरकार ने दो लाख की सहायता राशि दी है जो कि काम है, कम से कम पांच लाख की सहायता राशि दी जाए। इंदौर की घटना पर मप्र कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में 11 जनवरी को सुबह 11 बजे पैदल मार्च निकाला जा रहा है, प्रदेश में रैली आयोजित कर रहे हैं, यह पैदल मार्च बड़ा गणपति मन्दिर से राजवाड़ा चौक पर मौजूद अहिल्याबाई होल्कर प्रतिमा तक निकल जाएगा, भिण्ड शहर से अधिक से अधिक संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल होंगे।
धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया उर्फ पिंकी ने कहा कि केन्द्र की सरकार मनरेगा का नाम बदलकर बीबी जी राम जी कर रही है, केन्द्र सरकार नाम बदलकर योजना को खत्म करना चाहती है, पहले 100 दिन काम की गारंटी थी अब काम की कोई गारंटी नहीं रहेगी। फसल कटाई के मौसम में मजदूरों को कम नहीं मिलेगा, मोदी सरकार मजदूरों की मजदूरी मनमर्जी तरीके से तय करेगी, मनरेगा में ग्राम पंचायत के माध्यम से अपने ही गांव में विकास के लिए काम मिलता था, मजदूरों के काम में मनरेगा मेट और रोजगार सहायक का सहयोग मिलता था और अब आप कहां और क्या काम करेंगे यह काम मोदी सरकार ठेकेदार के माध्यम से मनमाने ढंग से तय करेगी और पूरा फंड केन्द्र सरकार से आता था अब 60 प्रतिशत फंड केन्द्र सरकार देगी और 40 प्रतिशत फंड राज्य सरकारों द्वारा दिया जाएगा। कहीं राज्यों की माली हालत बहुत खराब है वह उक्त फंड की व्यवस्था नहीं कर पाएंगे, जिससे योजना बंद हो जाएगी। केन्द्र की भाजपा सरकार की यही मंसा है कि किसान मजदूर को कम ही ना मिले, आज से 20 साल पहले मनमोहन सिंह की सरकार ने महात्मा गांधी रोजगार ग्रामीण योजना शुरू कर ग्रामीण मजदूरों के हित में एक महत्वाकांक्षी कदम उठाया था, मोदी सरकार में हालात यह है कि पिछले 3 महीने से कई राज्यों में मजदूरों को मनरेगा के काम का भुगतान ही नहीं किया गया है। पत्रकार वार्ता में संतोष त्रिपाठी, हलीम पठान, रामहर्ष सिंह कुशवाह, रेखा भदौरिया, स्मिता शर्मा, शिवशंकर भदौरिया उपस्थित रहे।
Sunday, April 5
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