भिण्ड, 05 जनवरी.मनीष दुबे।
घर घर गीता का प्रचार हो जन अभियान के अंतर्गत शहर की हाउसिंग कॉलोनी में विश्व गीता प्रतिष्ठानम् द्वारा गीता स्वाध्याय पाठ किया गया। कार्यक्रम के मीडिया प्रभारी शैलेश सक्सेना ने बताया कि कार्यक्रम का प्रारंभ मुख्य यजमान राहुल सोनी द्वारा भगवान कृष्ण के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से हुआ।
जिला संयोजक विष्णु कुमार शर्मा द्वारा सामूहिक रूप से सस्वर स्वाध्याय पत्र का वाचन किया गया, उन्होंने उपस्थित सभी गीता प्रेमियों से हर हालत में गीता पढ़ने का आह्वान किया साथ ही गीता ग्रंथ को घर-घर पहुंचाने का आग्रह किया। सुभाषित का वाचन प्रमोद मिश्रा द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को जीवन में समय का सदुपयोग करना चाहिए मृत्यु किसी की प्रतीक्षा नहीं करती है। प्रदीप ऋषिश्वर द्वारा सभी लोगों से बार-बार यही निवेदन किया कि सभी अपने-अपने घरों में गीता का पाठ अवश्य करें गीता पाठ से व्यक्ति का जीवन बदल सकता है उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में, चिकित्सा के क्षेत्र में, कर्म के क्षेत्र में, धर्म तथा व्यवहारिक जीवन में गीता के महत्व को समझाया।
समाजसेवी गगन शर्मा द्वारा स्वामी विवेकानंद जी के एक प्रसंग द्वारा गीता की महत्ता बताई, उन्होंने बताया कि अमेरिका की शिकागो में अपने व्याख्यान के बाद जब वह अपने कमरे में थे तो उनकी टेबल पर गीता की पुस्तक के ऊपर अन्य किताबें रखी थी, जब एक अमेरिकन नागरिक ने उनसे पूछा कि यह गीता धार्मिक ग्रंथ है और इसे ही अपने सबसे नीचे रख रखा है तो विवेकानंद जी ने कहा कि विश्व में गीता ही सब गग्रंथों का आधार है और आधार हमेशा नीचे रहता है, अमेरिकन की आंखें फटी की फटी रह गई। अपने प्रेरणादायक प्रसंग में उन्होंने लोगों का ध्यान गीता की ओरआकर्षित किया। भानु श्रीवास्तव ने एक उदाहरण के माध्यम से गीता की महत्ता बताई, उन्होंने भी लोगों को गीता ग्रंथ को अपने जीवन में उतारने का आग्रह किया।
गीता के चतुर्थ अध्याय के श्लोक की व्याख्या करते हुए ज्ञानेन्द्र सिंह ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति करने व उन्हें अपना सखा बनाने की प्रेरणा दी, क्योंकि इस अध्याय में भगवान ने अर्जुन से कहा कि तू मेरा भक्त और सखा है इसलिए मैं तुझे यह रहस्य बताता हूं। भगवान ने इस अध्याय में कहा कि धर्म की ग्लानि अथवा हानि होने पर साधुओं का अर्थात सत्पुरुषों का उद्धार करने के लिए दुष्टों का विनाश करने के लिए और धर्म की स्थापना हेतु में हर युग में अवतरित होता हूं। मैं प्रकृति (माया) को अपने अधीन करके प्रकट होता हूं, मेरे इस दिव्य जन्म और कर्म को जो जानता है, वह देह त्याग होने के बाद पुनर्जन्म को प्राप्त नहीं होता भगवान ने प्रारंभ में कहा कि अर्जुन तेरे मेरे बहुत जन्म हो चुके हैं, लेकिन मैं उनको जानता हूं तू नहीं जानता। मुख्य यजमान राहुल सोनी द्वारा सभी आप आए हुए अतिथियों का पट्टिका पहनाकर कर आत्मीय स्वागत किया गया। कार्यक्रम की व्यवस्था एवं देखरेख शैलेश सक्सेना ने की। अंत में गीता जी की आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर महेश दुबे, महेन्द्र बाबू तिवारी, राजेन्द्र सिंह भदौरिया, दुर्गादत्त शर्मा, बलदेव शर्मा, राजीव शर्मा, आनंद त्रिपाठी, विपिन चौधरी, कुलदीप राजावत, आकाश यादव, विवेक यादव, देवांश गोस्वामी, अर्पिता गोस्वामी, कृष्ण गोस्वामी, विवेक सोनी, गौतम, ओम पुरोहित, प्रशांत वर्मा, पीएस सोनी, टीना, पूनम शर्मा, अंशू राजावत, आकाश मिश्रा, गुप्ता आदि उपस्थित रहे।


