भिण्ड, 31 दिसम्बर। प्रसिद्ध तीर्थस्थल रावतपुरा सरकार धाम में बुधवार को 108 श्रीरामार्चा महायज्ञ का पावन आयोजन किया गया। महायज्ञ के दौरान लगभग 20 हजार लोगों ने यज्ञ स्थल की परिक्रमा की और पुण्यलाभ अर्जित किया।
बता दें कि रावतपुरा धाम में 22 से 30 दिसंबर तक महामना पं. दीनदयाल उपाध्याय के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में रामकथा का आयोजन किया गया। जिसके बाद बुधवार को श्रीरामार्चा महायज्ञ का आयोजन किया गया। रामार्चा महायज्ञ में अनेक ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारणों के साथ 108 वेदियों का पूजन करवाया। इसके बाद श्रीराम दरबार का पूजेन अर्चन किया गया। रामार्चा के दौरान जबलपुर, सागर, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, रायपुर, भोपाल, ग्वालियर, झांसी, केरल, तमिलनाडु समेत अनेक जगह के श्रद्धालुओं ने यजमान बनकर श्रीराम की पूजा अर्चना की।
इस मौके पर रावतपुरा धाम के महंत रविशंकर महाराज ने कहा कि श्रीरामार्चा अनुष्ठान वैदिक सभ्यता के सोलह संस्कारों में से एक प्रमुख संस्कार माना गया है। यह केवल एक पूजन विधि नहीं, बल्कि सकल ब्रह्माण्ड का अर्चन है। उन्होने कहा कि श्रीरामार्चा विद्या स्वयं आदियोगी भगवान शंकर द्वारा प्रदत्त मानी गई है। शास्त्रों के अनुसार इस एक यज्ञ का फल हजारों अश्वमेध यज्ञों के समान होता है। इस पावन अनुष्ठान में सहभागिता से पापों का क्षय होता है, कष्टों का निवारण होता है तथा शांति, समृद्धि, शक्ति और विशेष कृपा की प्राप्ति होती है। यह मनोकामनाओं की सिद्धि के साथ-साथ मुक्ति-मोक्ष के पथ की ओर अग्रसर करने वाला एक दुर्लभ वैदिक अनुष्ठान है। वैदिक एवं सनातन परंपरा में अर्चन और अनुष्ठानों को सदैव सर्वोच्च एवं पूजनीय स्थान प्राप्त रहा है।
लोकशांति, जनकल्याण एवं विश्वमंगल के उद्देश्य से देवताओं, ऋषि-मुनियों एवं साधु-संतों द्वारा आदिकाल से चली आ रही यह वैदिक परंपरा आज भी अपनी पूर्ण श्रद्धा और शक्ति के साथ अनवरत प्रवाहित है।
आज होगा विशाल भण्डारा
रावतपुरा सरकार धाम पर चल रहे 11 दिवसीय महोत्सव के दौरान रामकथा एवं श्रीरामार्चा महायज्ञ के समापन के बाद नववर्ष के मौके पर एक जनवरी को विशाल भण्डारे का आयोजन किया जाएगा। जिसमें आस-पास क्षेत्र सहित दूरजराज के लगभग पचास हजार श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण करेंगे।
Sunday, April 5
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