– प्रेस्टीज में युवा संसद 1.0 का भव्य शुभारंभ
ग्वालियर, 16 अप्रैल। प्रेस्टीज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एण्ड रिसर्च ग्वालियर का विधि विभाग एक बार फिर शैक्षणिक और व्यावहारिक कौशल के संगम का साक्षी बनने जा रहा है। संस्थान द्वारा आगामी 17 और 18 अप्रैल को अपने प्रांगण में युवा संसद 1.0 का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम स्व. हाकिम सिंह तोमर की स्मृति में हाकिम सिंह देवेन्द्र सिंह तोमर स्मृति न्यास के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इस दो दिवसीय आयोजन का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली, विधायी प्रक्रियाओं और संसदीय शिष्टाचार के प्रति जागरूक करना है। इसके माध्यम से छात्र न केवल कानून बनाना सीखेंगे, बल्कि देश के ज्वलंत मुद्दों पर तार्किक चर्चा करने की कला में भी निपुण होंगे।
युवा संसद में विभिन्न समितियों के माध्यम से गंभीर वैश्विक और राष्ट्रीय मुद्दों पर मंथन होगा जिसमें लोकसभा-अरावली पहाड़ियां : विकासात्मक आवश्यकताओं और पारिस्थितिक स्थिरता के बीच संतुलन, राज्यसभा-यूजीसी 2026 समानता नियम : हाशिए पर रहने वाले छात्रों के अधिकारों की रक्षा या रिवर्स भेदभाव का सृजन तथा अखिल भारतीय राजनीतिक दल बैठक: युवाओं का राजनीतिक लामबंदीकरण और आतंकवाद का खतरा : मिथक या वास्तविकता, इंटरनेशनल प्रेस: पत्रकारिता और फोटोग्राफी के माध्यम से रिपोर्टिंग आदि शामिल है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ऊर्जा मंत्री मप्र शासन प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अपने संबोधन में कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और उनके विचार ही भविष्य की नीतियों को दिशा देते हैं। उन्होंने अरावली हिल्स जैसे विषयों का उल्लेख करते हुए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने सतत विकास की दिशा में युवाओं की भागीदारी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
विशिष्ट अतिथि रिपुदमन सिंह तोमर ने लोकतंत्र में संवाद और विचार-विमर्श की संस्कृति को अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि युवा संसद जैसे मंच विद्यार्थियों को वास्तविक राजनीतिक एवं सामाजिक मुद्दों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने एआईपीपीएम के संदर्भ में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी तथा आतंकवाद जैसे गंभीर विषयों पर जागरुकता बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। सुधा तोमर ने अपने संबोधन में शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं की सहभागिता एवं नेतृत्व क्षमता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समानता और अधिकारों की रक्षा के लिए युवाओं को संवेदनशील एवं सजग होना आवश्यक है।
संस्थान के निदेशक डॉ. निर्मल्या बंद्योपाध्याय ने युवा संसद 1.0 के अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यवहारिक अनुभव, विश्लेषणात्मक सोच एवं नेतृत्व क्षमता का विकास भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि युवा संसद जैसे मंच विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझने, तर्कसंगत विचार रखने तथा राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीरता से चिंतन करने का अवसर प्रदान करते हैं।
विधि विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. राखी सिंह चौहान ने बताया कि कानून की शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इस तरह के आयोजनों से छात्रों में ड्राफ्टिंग स्किल्स, साक्ष्यों की समझ और पेशेवर नैतिकता का विकास होता है, जो एक सफल अधिवक्ता बनने के लिए अनिवार्य है तथा उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युवा न केवल देश का भविष्य हैं, बल्कि वर्तमान में भी परिवर्तन के वाहक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे तर्कसंगत सोच, नैतिकता एवं जिम्मेदारी के साथ समाज एवं राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।
विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों के लिए कुल नकद पुरस्कारों की घोषणा की गई है। जिसमें लोकसभा/ राज्यसभा/ एआईपीपीएम, में प्रथम पुरस्कार- 21 हजार रुपए, द्वितीय पुरस्कार- 11 हजार रुपए, तृतीय पुरस्कार- 5100 रुपए तथा पत्रकारिता/ फोटोग्राफी (पीआई)- 11 हजार की राशि निर्धारित की गई है तथा सभी विजेताओं को नगद पुरस्कार के साथ-साथ ट्राफी तथा सर्टिफिकेट भी प्रदान किए जाएंगे। इस युवा संसद कार्यक्रम में भारत के अलग-अलग क्षेत्र से प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया है, जिसमें दिल्ली, यूपी और मप्र सहित विभिन्न राज्यों के लगभग 300 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इस कार्यक्रम में प्रतिभागी शामिल होकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
इस आयोजन को सफल बनाने में हाकिम सिंह देवेन्द्र सिंह तोमर स्मृति न्यास (मुख्य प्रायोजक) के साथ-साथ द बेंच प्रेप एकेडमी, मनुपात्रा, विधि एकता संघ, लॉ फोयर्स, लॉ भूमि, द लॉ पिलर, द एबीडी सर्विसेज, ग्रोवर लॉ हाउस, सुयश चतुर्वेदी और कौशल माहेश्वरी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का सहयोग प्राप्त है तथा कार्यक्रम के पहले दिन सामाजिक संध्या का आयोजन शाम 5 से 6 बजे के बीच किया जाएगा। जिसमें सभी प्रतिभागी डीजे की धुन पर थिरकेगें।
इस कार्यक्रम के समन्वयक सह-प्राध्यापक राहुल श्रीवास्तव और सह- समन्वयक सह-प्राध्यापिका डॉ. दीक्षा भदौरिया द्वारा किया जा रहा है तथा कार्यक्रम में संस्थान के सह-प्राध्यापक डॉ. अक्षय भार्गव, आबिल हुसैन, साहिल वर्मा, डॉ. आदित्य नारायण मिश्रा, सह-प्राध्यापिका मानसी सोनी, रिचा मित्तल मौजूद रहे। कार्यक्रम संचालन और आभार व्यक्त सह-प्राध्यापिका मानसी गुप्ता तथा जिज्ञासा वोहरा ने किया।


