भिण्ड, 11 अप्रैल। राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के अवसर पर सुप्रयास संस्था द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र फूफ में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व, उचित स्वास्थ्य देखभाल, सुरक्षित प्रसव एवं प्रसवोत्तर सेवाओं के प्रति जागरूक करना था।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता डॉ. बीना होतगी ने कहा कि मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच, संतुलित पोषण एवं संस्थागत प्रसव अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित महिलाओं एवं परिजनों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने तथा अंधविश्वासों से दूर रहने की सलाह दी। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि भारत में हर वर्ष 11 अप्रैल को यह दिवस मनाया जाता है, जो कि कस्तूरबा गांधी की जयंती के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देना है। साथ ही प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत माह की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे समय पर जोखिम की पहचान कर उचित उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
डॉ. आकांक्षा दीक्षित ने अपने संबोधन में कहा कि मां बनना एक सुखद अनुभव है, लेकिन परफेक्ट मां बनने का दबाव कई महिलाओं को मानसिक तनाव और अवसाद की ओर धकेल सकता है। आज के समय में यह जरूरी है कि हम माताओं के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य का भी समान रूप से ध्यान रखें। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था और प्रसव के बाद हार्मोनल बदलाव के कारण कई महिलाओं को चिंता, तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार देश में लगभग 22 प्रतिशत महिलाएं गर्भावस्था या प्रसव के बाद मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित होती हैं। हर समय खुश रहने का दबाव और सामाजिक अपेक्षाएं इस समस्या को और गंभीर बना देती हैं।
सुप्रयास संस्था के सचिव डॉ. मनोज जैन ने कहा कि सुरक्षित मातृत्व केवल सुरक्षित प्रसव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मां का मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्वास्थ्य भी शामिल है। उन्होंने परिवार और समाज से अपील की कि वे गर्भवती महिलाओं को सहयोगात्मक वातावरण प्रदान करें तथा उनकी भावनाओं को समझें। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा मातृ मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख संकेतों जैसे- लगातार उदासी, अत्यधिक चिंता, नींद की समस्या, थकान और बच्चे से जुड़ाव में कमी की पहचान एवं उनके समाधान पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही स्तनपान, पोषण, पर्याप्त विश्राम और भावनात्मक सहयोग को मातृ स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक बताया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी महिलाओं एवं परिजनों को यह संदेश दिया गया कि किसी भी प्रकार की मानसिक परेशानी को नजरअंदाज न करें और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं, आशा कार्यकर्ता एवं स्वास्थ्य स्टाफ उपस्थित रहे। अंत में आयोजकों द्वारा सभी उपस्थितजनों का आभार व्यक्त करते हुए सुरक्षित मातृत्व के संदेश को घर-घर तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
Sunday, April 12
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