भिण्ड, 08 अप्रैल। दबोह क्षेत्र में खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम पिछले कुछ समय से बेहद सक्रिय नजर आ रही है, लेकिन यह सक्रियता अब चर्चाओं और विवादों के घेरे में है। जिस तरह से टीम हर बार अपनी गाड़ियां बदल रही है, उससे विभाग की मंशा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस दौरान उनकी कार्रवाई का अनूठा तरीका देखा जा रहा है, कभी ब्लैक स्कॉर्पियो, तो कभी व्हाइट अर्टिगा।
हैरानी की बात यह है कि सरकारी कार्रवाई के लिए आने वाली टीम किसी सरकारी वाहन के बजाय निजी नंबर की लग्जरी गाड़ियों का सहारा ले रही है। हाल ही में खाद विभाग की टीम ने दबोह में ब्लैक स्कॉर्पियो से पहुंचकर कुछ किराने की दुकानों पर छापेमारी की थी। जिसे देखकर लोग समझ ही नहीं पाए कि यह सरकारी अमला है या कोई निजी दल। उसी तरह बुधवार को फिर विभाग के अधिकारी ग्वालियर पासिंग की अर्टिगा गाड़ी से दबिश देने पहुंचे।
किराना व मिठाई व्यापारियों में संशय
बुधवार को हुई छापेमारी के दौरान जब सफेद रंग की अर्टिगा गाड़ी से उतरा खाद्य विभाग का अमला सीधे दुकान में घुस बैठा, तब पता चला कि खाद विभाग की छापेमारी है। फिलहाल तो अगर कार्रवाई नियम अनुसार है तो विभाग को पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए। ग्वालियर नंबर की निजी गाड़ियों से आकर अचानक दुकानों में घुसना भय का माहौल पैदा करता है, जो किसी भी सभ्य प्रशासन की कार्यशैली नहीं हो सकती। फिलहाल तो बड़े सवाल यह उठ रहे हैं कि आखिर गाड़ियां बदलने की मजबूरी क्या? जनता और व्यापारियों के बीच अब यह सवाल कौंध रहा है कि आखिर विभाग को अपनी पहचान इतनी गुप्त रखने की जरूरत क्यों पड़ रही है? क्या सरकारी वाहनों का उपयोग न करना किसी विशेष सेटिंग या साठगांठ का हिस्सा है?
डर का माहौल या उगाही की आशंका
बिना किसी आधिकारिक पहचान के निजी गाड़ियों में घूम रहे अधिकारियों को लेकर बाजार में इस बात की चर्चा है कि यह कार्रवाई शुद्धता के लिए है या केवल लेन-देन का दबाव बनाने के लिए? नतीजों का क्या? हर हफ्ते टीम आती है, सैंपल लिए जाते हैं, लेकिन आज तक दबोह के लोगों को यह नहीं पता चला कि पिछली कार्रवाइयों में लिए गए सैंपल्स की रिपोर्ट क्या रही और किस बड़े मिलावटखोर पर ठोस कार्रवाई हुई।
किराना और मिठाई की दुकानों पर मचा हड़कंप, शटरें गिरी
बुधवार को हुई अचानक छापेमारी से नगर के मुख्य बाजारों में भगदड़ जैसी स्थिति देखी गई। टीम ने प्रमुख किराना दुकानों पर पहुंचकर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच की और संदिग्ध वस्तुओं के सैंपल लिए। जैसे ही ग्वालियर नंबर की अर्टिगा गाड़ी बाजार में रुकी और अधिकारियों ने दुकानों के दस्तावेजों व सामान की पड़ताल शुरू की, कई दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर खिसकते नजर आए।
Thursday, October 1
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