– कृष्ण व सुदामा चरित्र की कथा का हुआ वर्णन
भिण्ड, 08 अप्रैल। मेहगांव नगर में त्यागी बाग पचैरा रोड दैपुरिया कॉलेज के पास चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिवस की कथा में पं. विमलकृष्ण पाठक ने सुदामा चरित्र व सुखदेव विदाई का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि मित्रता में गरीबी और अमीरी नहीं देखनी चाहिए। मित्र एक दूसरे का पूरक होता है। भगवान कृष्ण ने अपने बचपन के मित्र सुदामा की गरीबी को देखकर रोते हुए अपने राज सिंहासन पर बैठाया और उन्हें उलाहना दिया कि जब गरीबी में रह रहे थे, तो अपने मित्र के पास तो आ सकते थे, लेकिन सुदामा ने मित्रता को सर्वोपरि मानते हुए श्रीकृष्ण से कुछ नहीं मांगा।
उन्होंने बताया कि सुदामा चरित्र हमें जीवन में आई कठिनाइयों का सामना करने की सीख देता है। सुदामा ने भगवान के पास होते हुए अपने लिए कुछ नहीं मांगा अर्थात निस्वार्थ समर्पण ही असली मित्रता है। कथा के दौरान परीक्षित मोक्ष व भगवान सुखदेव की विदाई का वर्णन किया गया। भगवताचार्य ने बताया कि भागवत में बताए उपदेशों और उच्च आदर्शों को जीवन में ढालने से मानव जीवन जीने का उद्देश्य सफल हो जाता है। श्रीमद् भागवत कथा के मुख्य यजमान परीक्षित अनचाई देवी राकेश त्यागी ठेकेदार निवासी मेहगांव के द्वारा कराई जा रही है।


