– बिहार के पूर्व सांसद डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कथा श्रवण की
भिण्ड, 07 अप्रैल। मेहगांव नगर में त्यागी बाग पचैरा रोड दैपुरिया कॉलेज के पास चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में भागवत का महात्म्य बताते हुए कथा वाचक भागवत रत्न व अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आचार्य पं. विमलकृष्ण पाठक ने छठवें दिवस मंगलवार को योगेश्वर भगवान कृष्ण की महारास की कथा एवं श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह की कथा का वर्णन किया।
उन्होंने महारास की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि एक बार ब्रज गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए कात्यायनी व्रत किया था। उनके इस व्रत से संतुष्ट होकर व्रज गोपियों को मनोकामना पूर्ण होने का वचन दिया था। अपने वचन को पूरा करने के लिए भगवान ने कार्तिक मास की शरद पूर्णिमा को ब्रज गोपियों की मनोकामना पूर्ण करने के लिए बंशी बजा कर महारास के लिए बुलाया। बंशी की ध्वनि सुनकर जो जिस स्थिति में थी, उसी स्थिति में सांसारिक मोह-माया त्याग कर भगवान की शरण में गहन वन में प्रस्थान किया। वहीं रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस प्रकार सब राजाओं को जीत लिया और विदर्भ राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया। उस समय द्वारकापुरी के घर-घर बड़ा ही उत्सव मनाया जाने लगा कंश वध की कथा में आचार्य ने कहा कि मथुरा में जाकर मामा कंश के दरबार में कृष्ण ने कंस का वध करके अपने नाना उग्रसेन माता देवकी और वसुदेव जी को कारागार से मुक्त कराया।
इस अवसर पर बिहार के पूर्व सांसद डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि राजनीति अगर कृषि सत्ता और धर्म सत्ता से चलेगी तो हमारा देश विश्वगुरु बनेगा। श्रीमद भागवत कथा मुख्य यजमान परीक्षित अनचाई देवी राकेश त्यागी ठेकेदार निवासी मेहगांव द्वारा कराई जा रही है। जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु कथा का रसपान करने आते है वहीं सभी भक्तों के लिए प्रतिदिन भंडारा प्रसादी की भी व्यवस्था आयोजकों के द्वारा कराई जा रही हे।
कथा में बिहार के पूर्व सांसद अरुण कुमार सिंह, मप्र के पूर्व मंत्री ओपीएस भदौरिया, पिंटू राठौर, पूर्व जिला उपाध्यक्ष सुधा राठौर, मंडल अध्यक्ष ग्वालियर शिवसिंह यादव, पार्षद राकेश चौधरी, उदय सिंह गुर्जर, हेमंत गुर्जर, केशव राठौर, हृदेश बंटी त्यागी, सुरेन्द्र त्यागी, ठेकेदार राजेश व्यास, महेश कौरव, राजेश त्यागी सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अमृतमय भागवत कथा का रसपान किया।


