-आईटीआई के पास स्थित मंशापूर्ण हनुमान मन्दिर परिसर में हो रही है कथा
भिण्ड, 01 अप्रैल। शहर के आईटीआई के पास स्थित मंशापूर्ण हनुमान मन्दिर प्रांगण में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास अतुल कृष्ण शास्त्री महाराज ने कृष्ण रुक्मणि विवाह का बहुत ही मन मोहक वर्णन किया।
शास्त्री ने बताया कि भीष्मक का बड़ा पुत्र रुक्मी भगवान श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था। वह बहन रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल से कराना चाहता था। रुक्मी ने अपनी मनमानी करके किसी की भी बात नहीं सुनते हुए रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल के साथ ही करने का निश्चय किया था। उसने शिशुपाल के पास संदेश भेजकर विवाह की तिथि भी निश्चित कर दी। रुक्मिणी को जब इस बात का पता लगा तो वह बहुत दुखी हुई। उसने अपना निश्चय प्रकट करने के लिए देवी रुक्मणि ने एक ब्राह्मण को द्वारिका भगवन श्रीकृष्ण के पास भेजा। संदेश में लिखा था कि हे नंद-नंदन आपको ही पति रूप में वरण किया है, मैं आपको छोड़कर किसी अन्य पुरुष के साथ विवाह नहीं कर सकती। मेरे पिता मेरी इच्छा के विरुद्ध मेरा विवाह शिशुपाल के साथ करना चाहते हैं। विवाह की तिथि भी निश्चित हो गई।
रुक्मिणी का संदेश पाकर श्रीकृष्ण रथ पर सवार होकर शीघ्र ही कुण्डिनपुर की ओर किसी को भी बिना बताए चल दिए। श्रीकृष्ण के चले जाने पर पूरी घटना की सूचना बलराम को मिली तब वे यादवों की सेना के साथ कुण्डिनपर के लिए चले। उधर भीष्मक ने पहले ही शिशुपाल के पास संदेश भेज दिया था। अंत में शिशुपाल निश्चित तिथि पर बहुत बड़ी बारात लेकर कुण्डिनपुर जा पहुंचा। रुक्मिणी विवाह के वस्त्रों में सज-धजकर गिरिजा के मंदिर की ओर चल पड़ी। वह अत्यधिक उदास और चिंतित थी। रुक्मिणी ने गिरिजा की पूजा करते हुए उनसे प्रार्थना की।


