भिण्ड, 01 मार्च.मनीष दुबे। होलिका दहन अच्छाई पर बुराई का प्रतीक है। यह पर्व हर साल फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस बार होलिका दहन दो मार्च को है। हालांकि, फाल्गुन पूर्णिमा यानी तीन मार्च को पड़ने वाला चन्द्र ग्रहण होलिका दहन और रंगोत्सव के बीच एक दिन का अंतर पैदा कर देगा, जिसके कारण होली चार मार्च को मनाई जाएगी।
इस साल होली को लेकर लोगों के मन में आशंका है होलिका दहन 2 मार्च को या 3 मार्च को, कब मनाया जाएगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर होगी। वहीं इसका समापन 3 मार्च को शाम 5 बजकर 7 मिनट पर होगा। ज्योतिषियों के अनुसार 2 मार्च को ही होलिका दहन किया जाएगा, क्योंकि 3 मार्च को चन्द्र ग्रहण लग रहा है। साथ ही 4 मार्च को होली खेली जाएगी।
पौराणिक कथा के अनुसार राक्षस हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। वह अपने ही भतीजे श्रीहरि भक्त प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन लोग होलिका की पूजा करते हैं और होलिका दहन की अग्नि में गाय के गोबर के उपले, गेहूं की बालियां और चने अर्पित करते हैं। साथ ही अग्नि की परिक्रमा लगाकर वे अपने घर-परिवार की सुख-समृद्धि और रोगों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।
Tuesday, September 29
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