भिण्ड, 15 फरवरी। मौ नगर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा पंडाल में पैर रखने तक की जगह नहीं बची और हजारों की संख्या में पहुंचे श्रोताओं ने भक्ति भाव के साथ कथा का श्रवण किया।
कथा वाचक महाराज ने सती चरित्र, शिव-पार्वती विवाह और भक्त ध्रुव की कथा का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान की भक्ति के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती, बस मन में सच्चा विश्वास होना चाहिए। उन्होंने समझाया कि अहंकार और मोह के कारण सती का पतन हुआ, जो हमें सीख देता है कि भक्ति के मार्ग में संदेह का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने ध्रुव प्रसंग में कहा कि पांच वर्ष के बालक ध्रुव की कठिन तपस्या और भगवान के प्रति उनकी अटल निष्ठा की कथा सुनकर पंडाल में मौजूद कई श्रोताओं की आंखें नम हो गईं। कथा के बीच-बीच में जब महाराज ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी, तो पूरा पंडाल जय श्रीकृष्णा के जयकारों से गूंज उठा। महिलाएं और बुजुर्ग अपने स्थान पर खड़े होकर नृत्य करने लगे, जिससे माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। भागवत कथा केवल सुनने की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का मार्ग है। जो व्यक्ति भगवान की शरण में निस्वार्थ भाव से जाता है, परमात्मा उसका हाथ थाम लेते हैं।
Sunday, April 5
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