– ऑल इंडिया परमिशन वाले फर्जी लाइसेंस बने देश की सुरक्षा के लिए खतरा
– पुलिस की जांच जारी, दो को लिया हिरासत में
भिण्ड, 20 जनवरी। जिले में फर्जी शस्त्र लाइसेंस के बड़े नेटवर्क का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। करीब 3 लाख रुपए में ऑल इंडिया वैधता वाले फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाकर सैकड़ों हथियार खरीदे जा रहे थे। यह नेटवर्क भिण्ड, ग्वालियर, उत्तर प्रदेश के इटावा-लखना और जम्मू-कश्मीर तक फैला हुआ है। फर्जी लाइसेंस पर क्यूआर कोड, कलेक्टर कार्यालय व एसपी कार्यालय की सील और वरिष्ठ अधिकारियों जैसे हस्ताक्षर तक छापे गए है, उक्त मामले की जानकारी जब जिला प्रशासन को लगी तो पुलिस ने 6 शस्त्र लाइसेंस धारियों पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। लेकिन जब जांच हुई तो ये लाइसेंस कलेक्टरेट की आर्म्स शाखा और पुलिस रिकार्ड में कहीं दर्ज नहीं मिले।
पुलिस अधीक्षक डॉ. असित यादव ने बताया कि मामले की जांच चल रही है, लगभग एक सैंकड़ा से अधिक फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनने का मामला सामने आया है। वहीं कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने भी जांच समिति गठित कर जांच शुरु करवा दी है, कलेक्टर ने चंबल कमिश्नर अन्य जिले के अधकारियों से जांच कराने के लिए पत्र लिखा है। साथ ही इस मामले में दो आरोपियों को हिरासत में लिया गया है।
जानकारी के अनुसार फर्जी लाइसेंसों पर भले ही क्यूआर कोड छपा हो, लेकिन स्कैन करने पर किसी तरह की वैध जानकारी सामने नहीं आती। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिन लाइसेंसों पर भिण्ड का नाम छपा है, वे ना तो कलेक्टर कार्यालय और ना ही एसपी कार्यालय के रिकॉर्ड में मौजूद है। मप्र में असली लाइसेंस पर जहां एक बार में 10 और साल में अधिकतम 25 कारतूस की अनुमति होती है, वहीं फर्जी लाइसेंस पर 50 से 100 कारतूस तक की अनुमति दर्ज है। इतना ही नहीं, इन लाइसेंसों पर पूरे भारत में वैधता और 2028 तक की अवधि दर्शाई गई है, जिससे हथियार देश में कहीं भी ले जाए जा सकते हैं। यही वजह है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गया है। जांच में सामने आया कि कुछ लाइसेंसों पर अपर जिला दण्डाधिकारी (एडीएम) के हूबहू हस्ताक्षर और सील लगी हुई है। वर्तमान में पदस्थ एडीएम एलके पांडेय के नाम और हस्ताक्षर की नकल कर लाइसेंस तैयार किए गए। एडीएम ने साफ कहा कि ऐसे किसी लाइसेंस पर उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए।
जम्मू-कश्मीर होम डिपार्टमेंट की सील भी इस्तेमाल
फर्जी लाइसेंसों पर गवर्नमेंट ऑफ जम्मू एंड कश्मीर, होम डिपार्टमेंट और अंडर सेक्रेटरी टू गवर्नमेंट की सील तक लगी हुई है। कुछ मामलों में 2016-17 के दौरान जम्मू-कश्मीर में डीसी के नाम से लाइसेंस बनवाने की बात भी सामने आई है।
दलाल, आर्म्स डीलर और फर्जी दस्तावेज
जांच में खुलासा हुआ है कि उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के लखना कस्बे में स्थित अटल सिंह कुशवाह आर्म्स एंड एम्युनिशन दुकान से यह नेटवर्क संचालित होता था। आरोप है कि आधार कार्ड में पता बदलवाकर भिध्ड का पता डाला जाता था और फिर आर्म्स लाइसेंस पोर्टल पर ऑनलाइन फर्जी लाइसेंस तैयार कर दिए जाते थे। महाराष्ट्र के रहने वाले हेमंत राजेन्द्र देवरे और राहुल दौलत पाटिल के आधार कार्ड में भिण्ड का पता जोड़कर फर्जी लाइसेंस बनाया गया है। ग्वालियर का एक डीलर 3 लाख रुपए लेकर आधार, पैन कार्ड और फोटो के आधार पर लाइसेंस बनवाने की गारंटी देता था। लाइसेंस बनने में करीब 6 महीने का समय बताया जाता था, लेकिन पूरी प्रक्रिया पहले से सेट रहती थी।
फर्जी बताए गए लाइसेंस धारक
जांच में जिन लोगों के लाइसेंस भिण्ड व जम्मू के डीएम कार्यालय में फर्जी बताए गए, उनमें अजीत सिंह कृष्णा नगर भिण्ड- 32 बोर पिस्टल शस्त्र नं. 320372, अशोक कुशवाह मढ़ैयापुरा लहार- 32 बोर पिस्टल शस्त्र नं.2615 व 315 बोर बंदूक शस्त्र नं.250137, गौरव सिंह भदौरिया गांधी नगर भिण्ड- 315 बोर बंदूक शस्त्र नं.1701-00653 व 32 बोर पिस्टल शस्त्र नं.87 एबी 2415, हेमंत राजेन्द्र देवरे जामुना रोड भिण्ड- 32 बोर पिस्टल शस्त्र नं. आरपी-163809, राहुल दौलत पाटिल महावीर गंज भिण्ड- 32 बोर पिस्टल शस्त्र नं. आरपी- 146624, जावेद अनवर वीरेन्द्र नगर भिण्ड- 32 बोर पिस्टल शस्त्र नं. आरपी- 163809 व 315 बोर बंदूक शस्त्र नं. एबी 04-5558, मो. राशिद महावीर नगर भिण्ड- 32 बोर पिस्टल शस्त्र नं.320478 व 315 बोर बंदूक शस्त्र नं. एबी 06-00145 हैं।

